जबलपुर के लिए ‘अभिशाप’ बन गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट 18 साल में करोड़ों खर्च, कई अधिकारी माल काटकर निकल गए, जनता झेल रही कष्ट

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जबलपुर के लिए ‘अभिशाप’ बन गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट 18 साल में करोड़ों खर्च, कई अधिकारी माल काटकर निकल गए, जनता झेल रही कष्ट

18 साल में करोड़ों खर्च, कई अधिकारी माल काटकर निकल गए, जनता झेल रही कष्ट

18 साल से अधूरा जबलपुर सीवर प्रोजेक्ट,जनता गड्ढों में, जिम्मेदार लापता!

300 करोड़ से अधिक लागत, 2010 की डेडलाइन, 2025 में भी अधूरा!

रोज़ाना हो रही दुर्घटनाएं, कोई जवाबदेही नहीं

एक जगह अधूरा, दूसरी जगह खुदाई शुरू – आखिर कब मिलेगा शहर को राहत?

The sewer line project became a 'curse' for Jabalpur 18 years ago
The sewer line project became a ‘curse’ for Jabalpur 18 years ago

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर

जबलपुर शहर में 18 वर्षों से अधूरे पड़े सीवर लाइन प्रोजेक्ट ने जनता की जिंदगी को मुसीबतों में डाल दिया है। 2006-07 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 300 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाला है, जिसे 2010 तक पूरा किया जाना था। लेकिन 2025 में भी स्थिति यह है कि शहर की गालियाँ, सड़कें, और कॉलोनियां सीवर की अधूरी खुदाई से तबाह हैं।

सड़कों पर मौत के गड्ढे, कोई चेतावनी नहीं

अभी हालात यह हैं कि सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे खुदे पड़े हैं, कहीं कोई बेरिकेडिंग नहीं, कोई इंडिकेशन नहीं। बाइक, ऑटो, और चार पहिया वाहन रोज़ाना इन खतरनाक इलाकों में फँसते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए घर से निकलना जोखिम बन गया है। हादसे आम हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप हैं।

काम अधूरा छोड़, नई खुदाई शुरू

शहर के कई इलाकों में एक जगह का काम अधूरा छोड़कर नई जगह खुदाई शुरू कर दी जाती है। नतीजतन पूरा जबलपुर खुदा पड़ा है। नागरिक सवाल कर रहे हैं – जब एक जगह का काम पूरा नहीं हो पा रहा, तो दूसरी जगह क्यों तोड़ा जा रहा है?

The sewer line project became a 'curse' for Jabalpur 18 years ago
The sewer line project became a ‘curse’ for Jabalpur 18 years ago

घोटाले की बू, लेकिन जांच नहीं

प्रोजेक्ट में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। जनता पूछ रही है कि 300 करोड़ से अधिक खर्च होने के बाद भी काम अधूरा क्यों है? किन ठेकेदारों को भुगतान किया गया, किस प्रगति के आधार पर? क्या यह मामला किसी बड़े घोटाले से जुड़ा है?

अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं

जब नगर निगम या परियोजना से जुड़े अधिकारियों से बात की जाती है तो जवाब मिलता है: “2 महीने में काम पूरा होगा”, “3 महीने और लगेंगे”। यह टालने वाली भाषा अब जनता के लिए मजाक बन चुकी है।

जनता का सवाल: कब मिलेगा जवाब?
क्या 18 साल भी किसी प्रोजेक्ट के लिए काफी नहीं होते?
क्या जनता की जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है?
आखिर किसके संरक्षण में चल रही है यह लापरवाही?

The sewer line project became a 'curse' for Jabalpur 18 years ago
The sewer line project became a ‘curse’ for Jabalpur 18 years ago

जनता की मांग

  1. प्रोजेक्ट की स्थिति पर सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाए
  2. नगर निगम द्वारा दुर्घटना पीड़ितों के लिए सहायता नीति बनाई जाए
  3. काम में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई हो
  4. हर वार्ड में प्रगति की रिपोर्ट ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए
  5. उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच आयोग का गठन हो
The sewer line project became a 'curse' for Jabalpur 18 years ago
The sewer line project became a ‘curse’ for Jabalpur 18 years ago

“यह सिर्फ सीवर लाइन का मामला नहीं, ये जवाबदेही और ईमानदारी की परीक्षा है।

“कमलेश श्रीवास्तव- अधीक्षण यंत्री नगर निगम एवं सीवर लाइन प्रोजेक्ट इंचार्ज

का कहना है कि सीवर लाइन का जो पुराना काम है वह अभी 10% बचा हुआ है, जो की जल्द से जल्द पूरे करने की कोशिश किया जा रहा है बारिश के कारण बहुत सी समस्याएं आ रही हैं इसके कारण काम को जल्दी पूरा करने में दिक्कत हो रही है….

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