ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही बहस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने पूछा कि जब एससी और एसटी वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिल सकता है, तो ओबीसी को समान लाभ क्यों नहीं मिल रहे हैं।
ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने पूछा कि जब एससी और एसटी वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिल सकता है, तो ओबीसी को समान लाभ क्यों नहीं मिल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिका में मांग की गई थी कि राज्य सरकार ओबीसी समुदाय को उनकी वास्तविक जनसंख्या के अनुसार आरक्षण प्रदान करे और समान अवसर सुनिश्चित करे।
न्यायालय ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “यदि अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जा सकता है, तो ओबीसी को भी ऐसा ही क्यों नहीं दिया जा रहा है?” न्यायालय ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में ओबीसी को 27% आरक्षण प्राप्त है। हालाँकि, ओबीसी संगठनों का दावा है कि उनकी जनसंख्या 50% से अधिक है और इसलिए उन्हें भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए।
