नहीं बचे वे शिक्षक

Revanchal
1 Min Read

अब नहीं बचे वे शिक्षक
जो अपने विद्यार्थियों की,
पुरानी कॉपी के खाली पन्ने से,
बनी कॉपी देखकर, दया भाव से,
किसी अन्य विद्यार्थी की, या स्वयं की,
एक्स्ट्रा कॉपी उस विद्यार्थी को,
दिला दिया करते थे।
अपना लंच बॉक्स नहीं लाने वाले,
उस विद्यार्थी को अपने लंच बॉक्स से,
या दूसरे विद्यार्थियों के अतिरिक्त भोजन से,
पेट भरा दिया करते थे ।
कमजोर विद्यार्थियों को,
जीवन के पाठ, पहाड़े,
शिक्षा और सीख याद करा दिया करते थे।
और तो और वक्त आने पर,
अपने विद्यार्थियों को,
हर बला और मुसीबत से,
निकाल लिया करते थे।
किंतु समय की तासीर ने,
सब बदल डाला है।
शिक्षा पवित्र कर्म ना होकर, व्यवसाय
और शिक्षक गुरु ना होकर, व्यापारी बन गए है।
देश के कर्णधारों ने शिक्षा और शिक्षक
को भयंकर वीभत्स रूप में
इस कदर बदला है।
दुर्भाग्य वश बच्चों को,
अच्छी शिक्षा के नाम पर,
हमें सिर्फ छला ही छला है।

विशाल शुक्ल
पातालेश्वर मार्ग
छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश
मोबाइल 9424300896

👁️ 117 views Views
Share This Article
Translate »