कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत पर बवाल — पत्रकार सड़क पर, प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा

Revanchal
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14 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौत ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। इस गंभीर मामले को लेकर अब पत्रकार जगत खुलकर मैदान में उतर आया है। 5 मई 2026 से पत्रकारों ने कान्हा प्रबंधन के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई है।


पत्रकारों का आरोप है कि वन विभाग और कान्हा प्रबंधन बाघों की सुरक्षा में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। हालात इतने गंभीर हैं कि बाघों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही, बल्कि मीडिया को भ्रामक जानकारी देकर सच्चाई छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।


एक ही कुनबे का खत्म होना बना बड़ा सवाल
गौरतलब है कि 21 अप्रैल से 29 अप्रैल 2026 के बीच सरही रेंज में एक बाघिन (T-141) और उसके चार शावकों सहित कई बाघों की मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। एक ही परिवार के खत्म हो जाने से न केवल वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश है, बल्कि यह घटना कान्हा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है।


प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) बताया जा रहा है, जो पालतू कुत्तों से जंगली जानवरों में फैलता है। लेकिन पत्रकार इस दावे को अधूरा और संदिग्ध मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


“प्रबंधन हटाओ, बाघ बचाओ” — पत्रकारों का नारा
धरने पर बैठे पत्रकारों ने साफ कर दिया है कि जब तक बाघों की मौत की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।


पत्रकारों की प्रमुख मांगें:
बाघों की मौत की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR दर्ज की जाए पार्क क्षेत्र में अवैध रिसॉर्ट और निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक
पिछले 5 वर्षों के बजट का सार्वजनिक लेखा-जोखा पत्रकारों को हर महीने पार्क मॉनिटरिंग की अनुमति
पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
वही इस पूरे घटनाक्रम में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। पत्रकारों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे संदेह और गहरा हो रहा है।


कान्हा की साख पर खतरा
कभी देश-विदेश में अपनी जैव विविधता और बाघों की संख्या के लिए मशहूर कान्हा टाइगर रिजर्व आज सवालों के घेरे में है। लगातार हो रही मौतों ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण पर सवाल उठाए हैं, बल्कि प्रदेश और जिले की छवि को भी प्रभावित किया है।


अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह सिर्फ आश्वासनों तक सिमट कर रह जाएगा।

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