कृषि अधिकारियों के शपथ पत्र से मचा हड़कंप
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने शपथ पत्र में किए गंभीर खुलासे
किसानों के हक पर डाका डालने के आरोप
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला/डिंडौरी
आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में किसानों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं में करोड़ों रुपये के बीज वितरण घोटाले का मामला लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में विभाग के ही अधिकारियों द्वारा दिए गए शपथ पत्रों ने पूरे कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत बीज वितरण में अनियमितता, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, किसानों की फर्जी सूची बनाने और वास्तविक लाभार्थियों को वंचित करने जैसे आरोप पहले से लगते रहे हैं। अब अमरपुर एवं मेहंदवानी विकासखंड से जुड़े अधिकारियों के शपथ पत्र सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
शपथ पत्र में फर्जी सूची तैयार कराने का आरोप

प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हेमंत मारवी ने शपथ पत्र में दावा किया है कि उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत बीज वितरण की वास्तविक जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर फर्जी सूचियां तैयार कराई गईं और वही सूचनाएं सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदकों को उपलब्ध कराई गईं।
शपथ पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसानों को योजनानुसार निर्धारित मात्रा में बीज वितरित नहीं किया गया तथा विभागीय अधिकारियों के मौखिक निर्देशों पर नियमों के विपरीत कार्य कराया गया।
किसानों से राशि वसूली और कम बीज वितरण के आरोप
शपथ पत्र के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (टरफा योजना) के अंतर्गत किसानों को नियमानुसार 75 किलो बीज दिया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि किसानों से निर्धारित राशि ली गई, जबकि उन्हें पूरी मात्रा में बीज उपलब्ध नहीं कराया गया।
मसूर बीज वितरण में भी अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों से निर्धारित दर पर राशि लेकर वितरण किया गया तथा दस्तावेजों में अलग जानकारी दर्ज की गई।
भंडारण रजिस्टर में भी गड़बड़ी का दावा
शपथ पत्र में यह भी कहा गया है कि वास्तविक खरीद और भंडारण की तुलना में अधिक मात्रा दर्शाते हुए रिकॉर्ड तैयार किए गए। कर्मचारियों पर दबाव बनाकर रजिस्टरों में हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
आरटीआई में फर्जी जानकारी देने का आरोप
अधिकारी ने दावा किया है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में वास्तविक सूची के स्थान पर फर्जी सूची उपलब्ध कराई गई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर तक फर्जी तरीके से दर्शाए गए।
पहले से दर्ज है एफआईआर, कार्रवाई का इंतजार
शिकायतकर्ता रूपभान सहित अन्य लोगों का आरोप है कि मामले की शिकायत भोपाल, जबलपुर और विभिन्न जांच एजेंसियों से की गई थी। बताया जा रहा है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा तत्कालीन उप संचालक अश्वनी झारिया सहित अन्य कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
किसानों के हितों से खिलवाड़ का आरोप
शपथ पत्र में यह भी कहा गया है कि विभागीय अधिकारियों के दबाव में अधीनस्थ कर्मचारियों से नियम विरुद्ध कार्य कराए गए और किसानों को मिलने वाले बीज एवं लाभों में व्यापक अनियमितताएं हुईं। शपथकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने बिना किसी दबाव के यह बयान दिया है ताकि किसानों के साथ हुई कथित अनियमितताएं उजागर हो सकें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
बड़े सवाल
क्या बीज वितरण योजनाओं में वास्तव में फर्जी लाभार्थी बनाए गए?
किसानों को निर्धारित मात्रा में बीज क्यों नहीं मिला?
आरटीआई में कथित रूप से फर्जी जानकारी किसके निर्देश पर दी गई?
भंडारण और वितरण रिकॉर्ड में अंतर की जिम्मेदारी किसकी है?
ईओडब्ल्यू जांच के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
डिंडौरी के किसानों से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में अब प्रशासन, कृषि विभाग और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यदि शपथ पत्र में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रदेश की कृषि योजनाओं में हुए बड़े घोटालों में से एक साबित हो सकता है।
