कान्हा में बाघों की मौत से हड़कंप, 5 माह में 7 मौतें, प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

Revanchal
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मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। कभी देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा कान्हा अब अपने चर्चित बाघों को लगातार खोता जा रहा है। बीते पांच महीनों में ही 7 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक वर्ष में यह आंकड़ा 12 तक पहुंच गया है।


पर्यटकों के बीच खास पहचान रखने वाली बाघिन नीलम के कोर एरिया छोड़ने के बाद से ही पर्यटन प्रभावित हुआ है। रोड नंबर-7 पर अक्सर दिखाई देने वाली नीलम पर्यटकों की पहली पसंद थी। इसके अलावा मोहिनी, सुनैना, बालाघाट मेल और अमाही फीमेल जैसे चर्चित बाघों की मौत ने भी वन्यजीव प्रेमियों को निराश किया है।


हालांकि वर्तमान में जूनियर बजरंग, महावीर मेल और डीजे-9 एमबी 3 फीमेल जैसे बाघ नजर आ रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतों से इनके भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।
हालिया घटनाक्रम ने हालात को और चिंताजनक बना दिया है।


03 अप्रैल को एक बाघ की मौत
05 अप्रैल को किसली रेंज के करई घाट में एक और बाघ मृत मिला
25 से 29 अप्रैल के बीच 4 शावकों और 1 बाघिन की मौत
इन घटनाओं ने पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले एक वर्ष में हुई 12 मौतों के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं—कहीं करंट के तार में फंसने से, कहीं आपसी संघर्ष में, तो कहीं संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कोर एरिया में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।


स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि हर घटना के बाद प्रबंधन अलग-अलग कारण बताकर मामलों को दबाने की कोशिश करता है। पत्रकारों को खुलकर जानकारी नहीं दी जाती और केवल प्रेस नोट या व्हाट्सएप अपडेट तक सीमित रखा जाता है। पार्क के अंदर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई पारदर्शी जांच सामने नहीं आई है।


लगातार हो रही घटनाओं से आक्रोशित स्थानीय लोग और संगठन अब आंदोलन की तैयारी में हैं। 5 मई को कान्हा प्रबंधन के खिलाफ धरना देने की घोषणा की गई है।

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