दैनिक रेवांचल टाईम्स – कोरबा जिले के भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली के आदिवासी किसानों ने कथित बेनामी जमीन सौदों और कब्जे की कोशिशों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने तानसेन चौक से रैली निकालकर जिलाधीश कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखी।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी एवं प्रभावशाली लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आदिवासी किसानों की पुश्तैनी जमीन पर दावा कर रहे हैं तथा उन्हें जमीन छोड़ने या बेदखल होने की धमकियां दे रहे हैं। प्रदर्शन के बाद डिप्टी कलेक्टर ने किसानों की समस्याएं सुनीं और गांव में शिविर लगाकर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पतरापाली एक आदिवासी बहुल गांव है, जहां अधिकांश लोग अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे हैं। भूमि कानूनों की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर कथित रूप से उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से कुछ लोग वर्ष 1990 में जमीन खरीदी का दावा करते हुए पंजीयन संबंधी दस्तावेज दिखाकर कब्जा छोड़ने का दबाव बना रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऐसे ही एक मामले में गैर-आदिवासी व्यक्ति द्वारा मंगल सिंह और भूखन लाल पिता लोहरी को उनकी जमीन से बेदखल कर कब्जा कर लिया गया, जिसके बाद पूरे गांव में भय का माहौल है।
प्रदर्शन में शामिल किसानों घसिया राम, पुनिराम, राजेश, तिजराम, भूखनराम, मिलक राम, धनीराम, जीवन सिंह, चमरा सिंह और महेत्तर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से न्याय की मांग की।
किसान सभा के संयुक्त सचिव , जिला सचिव तथा के राज्य महासचिव ने कहा कि इससे पहले भी वर्ष 1999 में ऐसा मामला सामने आया था, जिसमें न्यायालय ने आदिवासी भूमि का गैरकानूनी हस्तांतरण मानते हुए पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण कानूनन अवैध है और वर्तमान मामले भी उसी प्रकार के प्रतीत हो रहे हैं।
प्रशासन द्वारा गांव में शिविर लगाकर वास्तविक भूमि स्वामित्व की जांच एवं निराकरण का आश्वासन दिया गया है। किसान सभा एवं सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी किसानों के पक्ष में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। साथ ही आसपास के गांवों में भी ऐसे कथित बेनामी सौदों की जांच की मांग उठाई गई है।
