किसान कांग्रेस कमेटी प्रेसवार्ता आयोजित कर दी जानकारी
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला। किसान कांग्रेस कमेटी ने कृषि विभाग के उपसंचालक अश्वनी झारिया पर गड़बड़ घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं। वही एक तरफ लागातर मंडला जिले में किसानो के साथ किये गए भ्रष्टाचार घोटाले ग़बन अबैध वसूली को लेकर दैनिक रेवांचल ने मुहिम छेड़ रखी है।
लगातार रेवांचल समाचार पत्र की शूर्खियो को संज्ञान में लेकर किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष ने खबरों को संज्ञान में लेकर प्रेसवार्ता आयोजित कर मीडिया को कृषि विभाग में चल रहे और उपसंचालक अश्वनी झरिया के कारनामों से अवगत कराया गया। प्रेसवार्ता के दौरान जिला किसान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश ठाकुर, प्रदेश संयुक्त सचिव अभिनव नट्टू चौरसिया ने विशेष रूप से अश्विनी झारिया नामक अधिकारी को लेकर बड़ा खुलासा किया और दावा किया कि जिस अधिकारी को पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से निष्कासित किया गया था उसी अधिकारी को दोबारा मंडला में जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अश्विनी झारिया पर करीब 14 करोड़ 36 लाख 88 हजार 520 रुपये के गबन का गंभीर मामला दर्ज है। इतना ही नहीं आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्लू में धारा 420 सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध है और जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है। इसके बावजूद ऐसे अधिकारी की मंडला में पदस्थापना होना कई सवाल खड़े करता है। किसान कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने की सरकारी नीति करार दिया।
योजनाओं में बड़े स्तर पर गड़बडिय़ां
जिला अध्यक्ष अखिलेश ठाकुर ने कहा कि सरकार एक ओर किसानों के हितों की बात करती है वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए संचालित योजनाओं में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के आरोपी अधिकारियों को बचाने का काम किया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीज वितरण, कृषि अनुदान और अन्य किसान हितैषी योजनाओं में बड़े स्तर पर गड़बडिय़ां की जा रही हैं। पात्र किसानों तक लाभ पहुंचाने के बजाय योजनाओं का पैसा भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि कई किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पा रहे हैं जबकि रिकॉर्ड में वितरण पूरा दिखाया जा रहा है। कई मामलों में ऐसे लोगों के नाम पर लाभ दिखाया गया जिन्हें योजनाओं की जानकारी तक नहीं है।
करोड़ों रुपये का हो रहा बंदरबांट
किसान कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी फाइलों में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन दिखाकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया गया है। नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं बल्कि किसानों के भविष्य के साथ धोखा है। प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर में मामला दर्ज हो जिसकी जांच जारी हो उसे संवेदनशील जिम्मेदारी देना सीधे-सीधे प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर होती तो ऐसे अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाता लेकिन इसके उलट उसे संरक्षण दिया जा रहा है।
ईओडब्लू में भी है मामला दर्ज
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडला सहित कई जिलों में सरकारी योजनाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगते हैं वे कुछ समय बाद फिर प्रभावशाली पदों पर दिखाई देने लगते हैं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान किसान कांग्रेस पदाधिकारियों ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि अश्विनी झारिया के खिलाफ दर्ज मामले कोई राजनीतिक आरोप नहीं बल्कि जांच एजेंसियों में दर्ज तथ्य हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईओडब्लू में मामला दर्ज है और जांच जारी है तो सरकार को नैतिक आधार पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
कार्यवाही नही हुई तो होगा उग्र धरना प्रदर्शन
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा दबाव या संरक्षण है जिसके चलते ऐसे अधिकारी को बार-बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिनों के भीतर अश्विनी झारिया को मंडला से नहीं हटाया गया, तो किसान कांग्रेस बड़ा आंदोलन करेगी। कांग्रेस पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन केवल ज्ञापन या धरने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जिलेभर के किसानों को साथ लेकर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी
विवादित अधिकारी को दोबारा मंडला में पदस्थ क्यों?
वही प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसान पहले ही मौसम की मार फसल नुकसान, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता से परेशान हैं। ऐसे समय में यदि किसानों के लिए आने वाली योजनाओं में भी भ्रष्टाचार होगा तो किसानों का व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट जारी होते हैं लेकिन वास्तविक किसान आज भी सुविधाओं के लिए भटकने को मजबूर हैं।
