रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश की सियासत भी गजब ढाती है। पिछले पांच दिनों से सूबे की राजनीति पूरे शबाब पर है, और इसमें जो ‘हाई-वोल्टेज’ तड़का लगा है, उसने हॉलीवुड की थ्रिलर फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है।
मामला कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा सांसद बनाने के ताने-बाने से जुड़ा था। अब राजनीति में जब तक ‘विधायक शिफ्टिंग’ और ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का ड्रामा न हो, तब तक मज़ा कैसा? सो, पटकथा लिखी गई कि सभी विधायकों को एकजुट रख कर तेलंगाना या बेंगलुरु की वादियों में सुरक्षित सैर कराई जाए।
फिर क्या था, ‘चलो बुलावा आया है, हाईकमान ने बुलाया है’ की तर्ज पर सभी कांग्रेस विधायक बोरिया-बिस्तर समेट कर एयरपोर्ट की तरफ दौड़ पड़े।
मुंगेरीलाल के हसीन सपने और ‘बुढ़ापे का हनीमून’
राजनीति की सूखी ज़मीन पर हल चलाने वाले हमारे सम्मानीय विधायकों के लिए यह किसी लॉटरी से कम नहीं था। कुछ विधायक तो इस कदर गद्गद थे, मानो ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुराद पूरी हो गई हो। उम्र के इस पड़ाव पर, जब इंसान घुटनों के दर्द की दवा ढूंढता है, हमारे कुछ माननीय विधायक इसे ‘बुढ़ापे में हनीमून मनाने का सुनहरा मौका’ मानकर मन ही मन लड्डू फोड़ रहे थे। वो भी सपरिवार! यानी राजनीति की राजनीति और मुफ्त का पारिवारिक वेकेशन भी।
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के कुशल नेतृत्व में विधायकों की यह टोली हंसते-मुस्कुराते, खिलखिलाते फ्लाइट के अंदर दाखिल हो गई। जैसे ही आलीशान सीटों पर पैर पसारे, सेल्फी का दौर शुरू हो गया। विक्ट्री साइन (V) बनाकर तस्वीरें खींची जाने लगीं। बस इंतज़ार था तो इस बात का कि कब विमान के पहिए ज़मीन छोड़ें, कब वो बादलों को चीरते हुए बेंगलुरु या तेलंगाना उतरें और कब रिसॉर्ट के वीआईपी सुइट्स में आराम फरमाया जाए।
दिल के अरमां आंसुओं में बह गए…”
अभी विधायकों ने एयरहोस्टेस से पानी मांगना शुरू ही किया था कि अचानक मोबाइल की घंटी बजी। उधर से आदेश आया—”वापस लौट आओ!”
संसार की सबसे छोटी ‘वायु यात्रा’
जैसे ही हरीश चौधरी ने बेहद संजीदगी से कहा, “साथियों, फ्लाइट से बाहर उतरो, अब हमें प्रदर्शन करने चलना है,” वैसे ही मानो आसमान से बिजली गिर गई। विधायकों के चेहरे का रंग ऐसा उड़ा जैसे बिना धुला सूती कपड़ा। बुढ़ापे के हनीमून के सपने, रिसॉर्ट की ठंडी हवाएं और मुंगेरीलाल के सारे हसीन सपने… सब के सब रनवे पर ही धरे के धरे रह गए।
विमान उड़ा तो सही, लेकिन बिना हिले-डुले! यह इतिहास की पहली ऐसी ‘हवाई यात्रा’ बन गई जो सिर्फ बोर्डिंग पास लेने, सीट पर बैठने और फिर बिना टेक-ऑफ किए चुपचाप नीचे उतर आने तक सीमित रही। गिनीज बुक वाले भले ही चूक गए हों, लेकिन सोशल मीडिया ने इसे ‘संसार की सबसे छोटी वायुयान यात्रा’ का खिताब तुरंत दे दिया। भविष्य में जब भी दुनिया की सबसे संक्षिप्त यात्राओं का ज़िक्र होगा, एमपी कांग्रेस के इस ‘एयरपोर्ट मार्च’ को हमेशा याद किया जाएगा।
स्क्रिप्टेड ड्रामे’ से नाराज़ माननीय
फ्लाइट से उतरते वक्त विधायकों के चेहरे देखने लायक थे। जो पैर कुछ देर पहले हवा में थे, वो अब ज़मीन पर भारी मन से घिसट रहे थे। गुस्सा इतना था कि रनवे से बाहर आते-आते फूट पड़ा। कुछ विधायकों ने तो कैमरे और सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए सीधे अपने ही प्रदेश नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया।
उनका सीधा आरोप था:
यह सब एक ‘स्क्रिप्टेड ड्रामा’ था, जिसकी भनक तक उन्हें नहीं थी।
उन्हें बिना बताए इस ड्रामे का हिस्सा बनाया गया।
हवाई सफर के नाम पर उनके जज्बातों के साथ खिलवाड़ किया गया।
नतीजा
मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा का टिकट पक्का हुआ या नहीं, यह तो सब ने देखा , और बिना बैटिंग किया ही पवेलियन लौटना पड़ा लेकिन हमारे माननीयों की हवाई यात्रा ज़रूर ‘पैदल यात्रा’ में बदल गई। सोशल मीडिया पर अब इस ‘रनवे पॉलिटिक्स’ के मीम्स तैर रहे हैं और जनता मुस्कुराते हुए कह रही है,भैया, राजनीति में कब किसकी लॉटरी लग जाए और कब किसकी फ्लाइट कैंसिल हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता!
