रेवांचल टाइम्स मंडला प्रदेश भर के शासकीय विद्यालयों में 16 जून 2026 से विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं प्रारंभ होने जा रही हैं, लेकिन मंडला जिले में अब तक अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिक्षा सत्र के पहले दिन से ही पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने पर हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

इस संबंध में पालक-अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने शासन प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।पालक-अभिभावकों की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता एवं पालक महासंघ के जिला अध्यक्ष पी.डी. खैरवार ने मुख्यमंत्री, लोक शिक्षण संचालनालय, कलेक्टर, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग तथा जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि 16 जून से पूर्व अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। उनका कहना है कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
सूत्रों से जानकारी के अनुसार ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय 8 जून से खुल चुके हैं और शिक्षकों की उपस्थिति भी शुरू हो गई है। वहीं अप्रैल माह में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले भी विद्यालयों में पूरे माह कक्षाएं संचालित की गई थीं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि परीक्षा परिणाम जारी होने से पूर्व विद्यार्थियों को किस कक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया गया। दूसरी ओर, प्रत्येक वर्ष की तरह अप्रैल के अंतिम सप्ताह में अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। मई माह बीत जाने और जून का आधा समय गुजर जाने के बाद भी अब तक उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण करने के लिए कोई सूचना नहीं मिली है।अतिथि शिक्षकों का कहना है कि हर वर्ष भर्ती प्रक्रिया में देरी होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उन्हें भी अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ता है। इस बार भी स्थिति लगभग वैसी ही दिखाई दे रही है, जिससे शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त है।शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया जुलाई माह तक टलती है, तो 16 जून से शुरू होने वाली नियमित पढ़ाई का महत्वपूर्ण प्रारंभिक समय व्यर्थ चला जाएगा। इससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने का अतिरिक्त दबाव शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों पर पड़ेगा। बाद में जल्दबाजी में पढ़ाई कराने से विद्यार्थियों की विषयगत समझ कमजोर हो सकती है, जिसका असर वार्षिक और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सत्र के शुरुआती 10 से 15 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान विषयों की बुनियादी अवधारणाएं समझाई जाती हैं। यदि इस अवधि में नियमित शिक्षण नहीं हो पाता, तो विद्यार्थियों को पूरे वर्ष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, जहां पहले से ही नियमित शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
मंडला जिले में शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से अनेक विद्यालय शिक्षकविहीन या शिक्षकों के अपर्याप्त पदस्थापन की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में अतिथि शिक्षक ही शिक्षण व्यवस्था का प्रमुख आधार बनते हैं। बावजूद इसके उनकी नियुक्ति में होने वाली देरी शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।पालक महासंघ के जिला अध्यक्ष पी.डी. खैरवार ने कहा कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक हित सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तत्काल पूरी कर विद्यालयों में पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि 16 जून से शुरू होने वाला नया शैक्षणिक सत्र बिना किसी बाधा के संचालित हो सके और विद्यार्थियों का बहुमूल्य समय व्यर्थ न जाए।
