टीसी में जन्मतिथि की गलती ने रोका छात्र का भविष्य, दो माह से दफ्तरों के चक्कर काट रहा परिवार

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स बंजर बम्हनी मंडला शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय की एक लापरवाही अब एक छात्र के भविष्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। मामला नैनपुर तहसील अंतर्गत बंजर बम्हनी स्थित ब्राटइ कैरियर स्कूल का है, जहां अध्ययन कर चुके छात्र प्रिंस मरकाम की स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) में दर्ज गलत जन्मतिथि को सुधारने के लिए परिवार पिछले दो महीनों से भटक रहा है, लेकिन समाधान आज तक नहीं निकल सका।परिजनों का आरोप है कि स्कूल में प्रवेश के समय छात्र की जन्मतिथि गलत दर्ज कर दी गई थी।

अब जबकि छात्र को आगे की पढ़ाई के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता है, वही गलती उसके भविष्य के सामने बड़ी बाधा बन गई है। छात्र के पास जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिनमें जन्मतिथि सही दर्ज है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन सुधार करने में टालमटोल कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रिंस मरकाम ने केजी-1 से कक्षा पहली तक की पढ़ाई ब्राटइ कैरियर स्कूल में की थी। इसके बाद उसने शासकीय प्राथमिक शाला जहरमऊ में प्रवेश लेकर आठवीं तक शिक्षा ग्रहण की। अब नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए टीसी की जरूरत पड़ने पर जन्मतिथि की त्रुटि सामने आई।

जब परिजनों ने इसे सुधारने की मांग की तो उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है।परिजनों का कहना है कि चपरासी से लेकर प्राचार्य तक और बीईओ से लेकर डीईओ कार्यालय तक आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। दो माह बीत जाने के बाद भी त्रुटि यथावत बनी हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब छात्र के पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो आखिर जन्मतिथि सुधारने में इतनी बाधाएं क्यों खड़ी की जा रही हैं।


गलत जन्मतिथि के कारण छात्र का नौवीं कक्षा में प्रवेश प्रभावित हो सकता है। भविष्य में छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं, शासकीय योजनाओं और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में भी परेशानी खड़ी होने की आशंका है। एक छोटी सी लिपिकीय त्रुटि अब छात्र के शैक्षणिक भविष्य पर संकट बनकर मंडरा रही है।परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल टीसी में सुधार कराया जाए तथा दोषी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग ऐसे मामलों में भी संवेदनशील नहीं होगा, तो विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक छात्र को अपनी सही जन्मतिथि साबित करने के लिए कितने दफ्तरों की चौखट घिसनी पड़ेगी और शिक्षा विभाग कब उसकी पुकार सुनेगा।

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