री-वाइल्डिंग मॉडल सीखने कान्हा पहुँचा कर्नाटक वन विभाग का प्रतिनिधिमंडल

Revanchal
4 Min Read


बारासिंगा संरक्षण, गौर स्थानांतरण और वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन की कार्यप्रणाली का किया अध्ययन


दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला।
देश में वन्यजीव संरक्षण और री-वाइल्डिंग (पुनर्वन्यीकरण) कार्यक्रमों के सफल मॉडल के रूप में स्थापित कान्हा टाइगर रिजर्व का अध्ययन करने के लिए कर्नाटक वन विभाग का पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 30 जुलाई से 1 अगस्त तक तीन दिवसीय भ्रमण पर कान्हा पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने किया। दल में बांदीपुर टाइगर रिजर्व एवं भद्रा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक तथा बांदीपुर टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।


भ्रमण के प्रथम दिवस अधिकारियों का स्वागत करते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व की संरक्षण नीति, प्रबंधन प्रणाली तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी विभिन्न पहलों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कान्हा द्वारा अपनाई जा रही वैज्ञानिक प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया।
द्वितीय दिवस प्रतिनिधिमंडल ने घोरेला टाइगर री-वाइल्डिंग सेंटर एवं मुक्की क्वारंटीन सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान री-वाइल्डिंग की मानक प्रक्रियाओं, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था तथा वैज्ञानिक मॉनिटरिंग प्रणाली पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद दल ने भूरसिंह पब्लिक स्कूल, कान्हा चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य केंद्र का भ्रमण कर कर्मचारियों एवं स्थानीय समुदाय के लिए संचालित सुविधाओं की सराहना की।


प्रतिनिधिमंडल ने घासभूमि प्रबंधन एवं दीर्घकालिक घासभूमि पुनर्स्थापन के स्थायी अनुसंधान प्लॉट का भी निरीक्षण किया। यहां आक्रामक वनस्पतियों और झाड़ी आक्रमण के प्रभाव तथा उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के उपायों पर विशेषज्ञों के बीच विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
अध्ययन भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने बारासिंगा होम का निरीक्षण कर बारासिंगा संरक्षण में अपनाई जा रही बोमा तकनीक, इन-सीटू संरक्षण व्यवस्था तथा इस विलुप्तप्राय प्रजाति के सफल संरक्षण मॉडल की जानकारी प्राप्त की।


तृतीय दिवस खटिया स्थित ईको सेंटर में कान्हा द्वारा संचालित बड़े शाकाहारी वन्यजीवों के स्थानांतरण कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। अधिकारियों को हाल के वर्षों में गौर के सफल स्थानांतरण तथा जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने इन प्रयासों को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए कर्नाटक में प्रस्तावित री-वाइल्डिंग कार्यक्रमों के लिए उपयोगी अनुभव बताया।


इसके बाद दल ने कान्हा की ईको-पर्यटन व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया। कान्हा जंगल कैंप, पर्यटन प्रवेश द्वार, पर्यटक सुविधा केंद्र एवं स्मृति केंद्र का भ्रमण कर पर्यटक प्रबंधन, पर्यटन विनियमन तथा मध्यप्रदेश वन विभाग की एकीकृत ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली की सराहना की।
इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य री-वाइल्डिंग कार्यक्रमों के सफल संचालन, वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन तथा संरक्षण के व्यवहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना था। कर्नाटक के अधिकारियों ने कान्हा टाइगर रिजर्व के संरक्षण मॉडल को अपने राज्य के लिए उपयोगी और अनुकरणीय बताया।


इस अवसर पर क्षेत्र संचालक रविन्द्र मणि त्रिपाठी, पशु चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल, समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं फील्ड बायोलॉजिस्ट उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए कान्हा में संचालित विभिन्न संरक्षण एवं प्रबंधन कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

👁️ 1 views Views
Share This Article
Translate »