सरकारी धन की बंदरबांट या विकास का मजाक? पंचायत भवन तक की सड़क बदहाल, आखिर किस काम आ रहा करोड़ों का विकास बजट!

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स | मवई (मंडला)
विकासखंड मवई की ग्राम पंचायत केवलरी कला में विकास के सरकारी दावे जमीनी हकीकत के सामने पूरी तरह बौने नजर आ रहे हैं। स्टोन क्रेशर प्लांट के पास नदी किनारे से पंचायत भवन तक जाने वाली आंतरिक कच्ची सड़क बदहाल पड़ी है। बरसात में यह सड़क कीचड़ और गड्ढों से भर जाती है, जिससे रोजाना गुजरने वाले स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, किसानों और मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। सवाल यह है कि जब हर साल ग्राम पंचायतों को विकास के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये दिए जाते हैं, तो आखिर यह पैसा खर्च कहां हो रहा है?


ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग ही यदि चलने लायक नहीं है, तो फिर गांव में विकास के दावों का कोई औचित्य नहीं बचता। विकास सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर ग्रामीण बदहाल सड़कों पर चलने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि PESA एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने का अधिकार है। इसके बावजूद सबसे जरूरी कार्यों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यदि सामान्य मद में राशि नहीं है, तो मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि के अभिसरण से सड़क का मुरमीकरण कराया जा सकता है। फिर जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं?


ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों की प्राथमिकताएं जनता की जरूरतों से नहीं, बल्कि अपनी सुविधा और स्वार्थ के हिसाब से तय की जा रही हैं। सरकारी धन खर्च होने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन गांव की मूलभूत सुविधाएं आज भी बदहाल हैं। इससे यह संदेह भी गहराता है कि कहीं विकास के नाम पर सरकारी धन का उपयोग वास्तविक जरूरतों के बजाय केवल कागजी उपलब्धियां दिखाने में तो नहीं किया जा रहा।


अब ग्रामीणों ने प्रशासन, जनपद पंचायत और जिला पंचायत से मांग की है कि इस सड़क का तत्काल मुरमीकरण कराया जाए और यह भी जांच हो कि विकास मद की राशि किन कार्यों पर खर्च की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत भवन तक जाने वाली सड़क भी सुरक्षित और सुगम नहीं बन सकती, तो फिर विकास के बड़े-बड़े दावे जनता के साथ सिर्फ एक छलावा हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा कि आखिर ग्रामीणों की बुनियादी समस्याएं कब तक अनदेखी की जाती रहेंगी।

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