दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब एवं उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ि०अन्हा के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित आपत्तिजनक वीडियो/रील के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम पंचायत एवं मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद, मंडला के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण रैली निकालकर थाना कोतवाली पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
रैली बाद नमाज़-ए-जुमा रब्बानी चौक से प्रारंभ होकर थाना कोतवाली पहुंची, जहां थाना प्रभारी को ज्ञापन देकर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री से मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा इससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 11 जून 2026 को प्रसारित एक कथित पॉडकास्ट/रील में नाज़िया इलाही खान द्वारा पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब एवं उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ि०अन्हा के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि उक्त सामग्री @divyasingh4043 नामक इंस्टाग्राम अकाउंट से प्रसारित हुई, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
ज्ञापन में मांग की गई कि संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य लागू कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित वीडियो एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, विवादित सामग्री को हटाने तथा भविष्य में इस प्रकार की सामग्री के प्रसारण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
इस दौरान शहर काजी मुफ्ती अहमद अशरफ, पेश इमाम हाफिज फरीद रजा, मौलाना सैयद गुलाम रसूल, मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के प्रदेश सचिव हाजी शाह फैसल, जिला अध्यक्ष राशिद खान, मुस्लिम पंचायत अध्यक्ष अब्दुल शमीम सहित जावेद कुरैशी, मुजम्मिल खान, शारिक खान, नदीम खान, शाहरुख खान, वकील कुरैशी, मुईन खान, शेख आदिल एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।
मुफ्ती अहमद अशरफ ने कहा कि सभी धर्मों और धार्मिक महापुरुषों का सम्मान होना चाहिए तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली किसी भी टिप्पणी पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह मांग पूरी तरह शांतिपूर्ण, संवैधानिक एवं विधिसम्मत कार्रवाई के उद्देश्य से की गई है तथा किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी या कानून हाथ में लेने का समर्थन नहीं किया जाता।
