देवदरा पंचायत में विकास नहीं, चल रही मनमानी की सरकार

Revanchal
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सरपंच पति के इशारों पर पंचायत, वार्ड-10 बना जलभराव का नरक

रेवांचल टाइम्स मंडला ग्राम पंचायत देवदरा में विकास कार्यों की हकीकत बरसात की पहली ही बारिश में सड़क पर बहती नजर आ गई। एक ओर पंचायत के कुछ चुनिंदा वार्डों में करोड़ों की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई वार्ड आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में जनप्रतिनिधियों की नहीं बल्कि “सरपंच पति राज” की हुकूमत चल रही है, जहां विकास कार्य जनता की जरूरत के आधार पर नहीं बल्कि निजी पसंद और प्रभाव के आधार पर तय किए जा रहे हैं।


करीब 20 वार्डों वाली बड़ी ग्राम पंचायत देवदरा में विकास के नाम पर खुलेआम भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। पंचायत के रमपुरा और नर्मदा कॉलोनी क्षेत्र में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य सुविधाओं की भरमार दिखाई देती है, जबकि अन्य वार्डों के रहवासी बदहाल सड़कों, जलनिकासी की समस्या और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच का निवास रमपुरा में होने के कारण विकास भी वहीं केंद्रित हो गया है, जबकि बाकी वार्डों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।


सबसे गंभीर स्थिति वार्ड क्रमांक-10 की है, जहां थोड़ी सी बारिश ने पंचायत की विकास संबंधी पोल खोलकर रख दी। जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कें नदी में तब्दील हो गईं। करीब दो फीट तक पानी सड़क के ऊपर बहता रहा और कई घरों में घुस गया। लोगों के आंगन, कमरे और रसोई तक पानी पहुंच गया, लेकिन पंचायत प्रशासन कहीं दिखाई नहीं दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड-10 की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार पंचायत में आवेदन, निवेदन और शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। क्षेत्र की सड़क लगभग 12 से 15 वर्ष पुरानी है और अब पूरी तरह उखड़ चुकी है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सतह और जलभराव ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।


वार्डवासियों का कहना है कि जब नई सड़क नहीं बन पा रही थी तो उन्होंने केवल चार इंच कंक्रीट लेयर डालकर मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन पंचायत ने इस मामूली मांग को भी नजरअंदाज कर दिया। वहीं दूसरी ओर अन्य वार्डों में मरम्मत कार्यों के लिए स्वीकृतियां देकर तेजी से काम शुरू करा दिया गया। इससे पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला केवल सड़क और नाली तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने पंचायत में वर्षों से चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग पर भी आरोप लगाए हैं। बताया जाता है कि बिना समुचित दस्तावेज, बिना सड़क, बिना नाली, बिना बिजली और बिना खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं के भूखंड काटकर बेचे जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि पंचायत की एनओसी के सहारे यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है। नतीजा यह है कि अनियोजित कॉलोनियों में बरसात का पानी निकलने का रास्ता नहीं बचा और आज आम लोग जलभराव की समस्या झेलने को मजबूर हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत ने समय रहते अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाया होता और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की होती तो आज वार्ड-10 के लोगों को अपने घरों में पानी घुसने की नौबत नहीं आती। लेकिन पंचायत की कथित उदासीनता और संरक्षण ने समस्या को विकराल बना दिया है।


हैरानी की बात यह है कि वार्ड-10 में मुख्य सड़क से जघेला के घर तक कंक्रीट नाली निर्माण के लिए तकनीकी स्वीकृति (टीएस) लगभग तीन माह पहले मिल चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति (एएस) अब तक नहीं हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर जानबूझकर फाइल को रोका जा रहा है। यदि यह नाली समय पर बन गई होती तो बारिश का पानी सड़कों और घरों में नहीं भरता।


ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पंचायत में विकास का पैमाना क्या है यदि कुछ वार्डों में तत्काल स्वीकृतियां मिल सकती हैं, निर्माण कार्य शुरू हो सकते हैं और सुविधाएं पहुंच सकती हैं तो वार्ड-10 सहित अन्य उपेक्षित वार्डों को वर्षों तक इंतजार क्यों कराया जा रहा है
लोगों का आरोप है कि पंचायत में जनता की समस्याओं से ज्यादा राजनीतिक और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद हालात नहीं बदले। बरसात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कागजों में विकास के दावे चाहे जितने बड़े हों, जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है।
अब ग्रामीण जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों से मांग कर रहे हैं कि देवदरा पंचायत में हुए विकास कार्यों, स्वीकृत योजनाओं, अवैध प्लॉटिंग और वार्डवार खर्च की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पंचायत किसी एक मोहल्ले या वर्ग की नहीं बल्कि पूरे गांव की पंचायत बनकर काम करे।
बरसात का पानी उतर जाएगा, लेकिन सवाल बाकी रहेगा—क्या देवदरा पंचायत में विकास जनता के लिए हो रहा है या सिर्फ चहेते इलाकों के लिए।

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