दैनिक रेवांचल टाइम्स नरसिंहपुर | 7 जुलाई 2026। रेलवे परिसर में मंगलवार को क्षय रोग (टीबी) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को टीबी के प्रकार, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने किया।
डॉ. कुर्रे ने बताया कि फेफड़ों में होने वाली टीबी को पल्मोनरी टीबी (Pulmonary TB) कहा जाता है, जबकि शरीर के अन्य अंगों में होने वाली टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (Extra Pulmonary TB) कहा जाता है। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी की टीबी को पॉट्स स्पाइन (Pott’s Spine) तथा मस्तिष्क की टीबी को ट्यूबरकुलर मेनिनजाइटिस (Tubercular Meningitis) कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि टीबी का मरीज यदि समय पर और पूरा इलाज नहीं करवाता, तो बीमारी एमडीआर-टीबी (Multi Drug Resistant TB) का रूप ले सकती है, जिसका उपचार अधिक कठिन और लंबा होता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से आसपास के लोगों में संक्रमण फैल सकता है। विशेष रूप से कुपोषित, एनीमिया से ग्रसित बच्चों तथा कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों में टीबी होने का खतरा अधिक रहता है।
डॉ. कुर्रे ने कहा कि “टीबी को क्यों है छुपाना, अगर जीवन को बचाना है”। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को छिपाने के बजाय तुरंत जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा उपचार लें।
उन्होंने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में 14 दिनों से अधिक खांसी रहना, बलगम या खून के साथ खांसी आना, बुखार आना और
