दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।
शहर को स्मार्ट और सुविधायुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगरपालिका मंडला की जमीनी हकीकत दादा धनीराम वार्ड क्रमांक-24 स्थित गोकुलधाम सोसायटी में साफ दिखाई दे रही है। यहां सीवर लाइन और नल-जल योजना के नाम पर ठेकेदार ने पूरी सड़क खोद डाली, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत करना शायद जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी ही नहीं समझी। पहली ही बारिश ने विकास के दावों की परतें उधेड़ दीं और पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो गई।
आज हालात यह हैं कि सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं। गड्ढों में भरा पानी दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रहा है। बच्चे स्कूल जाने में डर रहे हैं, बुजुर्ग घरों में कैद होने को मजबूर हैं और दोपहिया वाहन चालक हर पल गिरने के खतरे के बीच सफर कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
सबसे बड़ा सवाल नगरपालिका परिषद और संबंधित सीवर लाइन ठेकेदार पर खड़ा होता है। क्या विकास कार्यों का मतलब सिर्फ सड़क खोदकर छोड़ देना है? क्या जनता की परेशानी से किसी को कोई सरोकार नहीं? यदि सड़क की समय पर मरम्मत नहीं होनी थी, तो आखिर किस आधार पर कार्य पूर्ण माना गया और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई?
कॉलोनीवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से नगरपालिका कर, नजूल कर और अन्य सभी करों का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सुविधाओं के नाम पर जलभराव, कीचड़ और बदहाल सड़कें मिल रही हैं। यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी है।
रेवांचल टाइम्स के माध्यम से कॉलोनीवासियों एव कॉलोनी के मीडिया प्रभारी नवनीत साहू ने कार्यवाही की माँग की है और जल्द से जल्द लोगों के लिए सुचारू व्यवस्था बनाने की बात की है। और कलेक्टर मंडला से मांग की है कि वे स्वयं स्थल का निरीक्षण कराएं, संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार की जवाबदेही तय करें और सड़क की तत्काल मरम्मत कराकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करें।
जनता के सवाल
सड़क खोदने के बाद मरम्मत क्यों नहीं हुई? ठेकेदार पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारी कहां हैं? जनता से टैक्स लेने वाली नगरपालिका जवाबदेही कब निभाएगी? विकास का मतलब केवल योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन देना है। यदि जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार इसी तरह मनमानी करते रहे, तो जनता का भरोसा विकास पर नहीं, बल्कि अव्यवस्था पर ही कायम रह जाएगा।
