बोट ब्रो के नाम पर लाखों की रकम डकारने का खेल? एजेंटों ने पहले दिलाया भरोसा, अब दिखा रहे आवेदन की ढाल!

Revanchal
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खुद को ‘डॉक्टर’ बताने वाले कथित एजेंट पर निवेशकों के गंभीर आरोप, जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में एक बार फिर निवेश के नाम पर आम लोगों से लाखों रुपये जुटाने और बाद में जिम्मेदारी से बचने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि बोट ब्रो (Bot Bro) नामक कंपनी के नाम पर जिले के कई लोगों से मोटे मुनाफे और राशि दोगुनी होने का लालच देकर निवेश कराया गया। अब जब निवेशक अपनी जमा पूंजी वापस मांग रहे हैं तो उन्हें अलग-अलग बहाने बनाकर टाला जा रहा है।

पीड़ितों का आरोप है कि खुद को डॉक्टर बताने वाले एक कथित एजेंट ने लोगों का विश्वास जीतकर बड़ी संख्या में निवेश कराया। शुरुआत में समय पर भुगतान और आकर्षक लाभ का भरोसा देकर लोगों को जोड़ा गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। अब निवेशकों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत की कमाई फंस गई है।

पहले भरोसा, फिर निवेश, अब आवेदन की ढाल?

पीड़ितों का आरोप है कि जब लोगों ने अपनी राशि वापस मांगी तो एजेंटों ने यह कहना शुरू कर दिया कि कंपनी फरार हो चुकी है। इसके साथ ही कुछ एजेंटों ने प्रशासन को दिए गए आवेदनों की प्रतियां दिखाकर खुद को भी पीड़ित बताना शुरू कर दिया।

निवेशकों का कहना है कि सवाल यह है कि यदि एजेंट वास्तव में स्वयं भी पीड़ित हैं, तो निवेशकों की रकम जुटाने के दौरान उनकी क्या जिम्मेदारी थी? क्या उन्होंने कंपनी की वैधता की जांच की थी? क्या निवेश से जुड़े जोखिमों की जानकारी लोगों को दी गई थी? इन सवालों के जवाब अभी भी सामने नहीं आए हैं।

राजनीतिक प्रभाव का भी आरोप

कुछ निवेशकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें यह कहकर डराने की कोशिश की जाती है कि संबंधित एजेंट राजनीतिक प्रभाव रखते हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। यदि ऐसा है तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि कानून के प्रति लोगों के विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

क्या निवेश की रकम से खरीदी गई संपत्तियों की होगी जांच?

पीड़ितों की मांग है कि जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएं कि निवेश के दौरान जुटाई गई राशि का उपयोग कहां हुआ। यदि एजेंटों या उनके परिजनों के नाम पर जमीन, वाहन, ट्रक या अन्य संपत्तियां खरीदी गई हैं, तो उनकी भी जांच होनी चाहिए। यदि यह संपत्ति निवेशकों के पैसों से अर्जित हुई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।

प्रशासन के सामने भी बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पहले से आवेदन दिए गए थे तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या समय रहते जांच होती तो और लोगों को निवेश करने से रोका जा सकता था? क्या जिले में बिना अनुमति निवेश योजनाओं का प्रचार करने वालों पर निगरानी की कोई व्यवस्था है?

आमजनता और इन्वेस्टरों का सवाल

क्या बोट ब्रो में निवेश कराने वाले एजेंटों का पूरा नेटवर्क चिन्हित किया जाएगा?

जिन लोगों ने निवेश कराया, उनकी कानूनी जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?

क्या कथित एजेंटों की चल-अचल संपत्तियों की जांच होगी?

प्रशासन को पहले दिए गए आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई?

निवेशकों की फंसी हुई रकम वापस दिलाने के लिए जिला प्रशासन क्या कदम उठाएगा?

मंडला जैसे आदिवासी जिले में जहां लोग अपनी जीवनभर की बचत विश्वास के आधार पर निवेश कर देते हैं, वहां ऐसी घटनाएं केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि लोगों का भरोसा भी तोड़ती हैं। यदि आरोप सही हैं तो यह मामला केवल एक कंपनी के बंद होने का नहीं, बल्कि उन लोगों की जवाबदेही का भी है जिन्होंने कंपनी का प्रचार कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन, पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करे और पीड़ित निवेशकों को न्याय दिलाए।

वहीं जब दैनिक रेवांचल टाइम्स ने एजेंट रोशन चंद्रोल से इस बात पर जानकारी लेनी चाही तो इनके द्वारा न ही फ़ोन उठाया गया और न ही संबंधितों के पैसों की जानकारी दी है।

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