क्या नए कलेक्टर और नए कमिश्नर खत्म कर पाएंगे जबलपुर में अवैध कॉलोनियों का काला सम्राज्य?

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Will the new collector and new commissioner be able to end the black empire of illegal colonies in Jabalpur?

“श्रीनिवास बाबा बर्फानी निवास” से खुला कॉलोनाइजर का बड़ा खेल – अब प्रशासन की सख्ती की कसौटी

दैनिक रेवांचल टाइम्स – जबलपुर इन दिनों
जबलपुर नगर से लेकर ग्रामीण अँचलों तक अबैध कालोनियों और कालोनाइजर का सम्राज्य तेजी से फैल रहा है और ये कालोनाइजर झूठ का पुलिन्दा बनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहें हैं और जिम्मेदार राजस्व विभाग नगर निगम स्थानीय पार्षद सब के सब हाथ पे हाथ रखें हुए हैं और लोगो को लूटने के लिए छोड़ दिये हैं और नगर में अवैध कॉलोनियों का खेल अब वर्षों पुराना नहीं बल्कि संगठित “काला साम्राज्य” बन चुका है। हाल ही में उजागर हुई नगर निगम जबलपुर के अंतर्गत दीनदयाल बस स्टेंड के आसपास संचालित “श्रीनिवास बाबा बर्फानी निवास” कॉलोनी ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है – क्या नए कलेक्टर और नए नगर निगम कमिश्नर कॉलोनी के नाम पर कालोनाइजर के द्वारा खेला जा रहा इस गंदे खेल को रोक पाएंगे? या फिर पहले की तरह भूमाफ़िया और विभागीय साठगांठ का खेल जारी रहेगा?

अवैध कॉलोनियों की फुलप्रूफ चाल
बिना नगर निगम अनुमति और साठगांठ

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन कॉलोनी की न नगर निगम से कोई विकास की अनुमति प्राप्त की और न ही टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) पंजीकरण बिना नक्शा पासिंग
इसके बावजूद खुलेआम कालोनाइजर प्लॉटिंग कर के मकान बनाकर 14 से 42 लाख रुपये तक के मकान बेचे जा रहे हैं। और सरेराह बड़े बड़े विज्ञापन जारी किए जा रहे है जहाँ पर विज्ञापनों में “100% संतुष्टि, धनवापसी गारंटी, नजदीकी स्कूल-कॉलेज” जैसी बातें लिखकर भोली जनता को फंसाया जा रहा है। और उनके साथ धोखाधडी की जा रही है

कानून साफ है – लेकिन अमल गायब

वही नगर निगम अधिनियम 1956 (धारा 293, 307) – बिना अनुमति निर्माण अपराध। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम 1973 (धारा 15, 16) – बिना पंजीकरण बिक्री अवैध। IPC 420 – धोखाधड़ी, संज्ञेय अपराध। सुप्रीम कोर्ट आदेश – अवैध कॉलोनी में खरीदार को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं। स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद, जबलपुर में यह खेल खुलेआम जारी है।

पीड़ितों की गवाही – “सपनों का घर बना सिरदर्द”

  1. “17.81 लाख रुपये देकर 1BHK खरीदा। पता चला की कॉलोनी कही रजिस्टर्ड ही नहीं है। अब कहां जाएं?” पैसा फस गया है
  2. “पूरी जमा पूंजी लगाई, अब सुन रहे हैं यह सब अवैध है। बच्चों का भविष्य अंधेरे में है।” करे तो क्या
  3. “14 लाख में मकान लिया। बाद में पता चला न रजिस्ट्री है, न मंजूरी। शिकायत करने पर अफसर चुप।” हमे झूठ परोसा गया हैं

करोड़ों का राजस्व नुकसान

हर मकान और प्लॉट पर लगने वाला टैक्स और स्टाम्प ड्यूटी सरकार तक नहीं पहुंच रहा। सिर्फ एक कॉलोनी से करोड़ों का घाटा, यानी यह सिर्फ़ ठगी नहीं बल्कि “राजस्व घोटाला” भी है।
कॉलोनाइज़र का तर्क – जनता को बहलाने का हथियार

वही कुछ स्थानीय लोग नाम न छापने पर बताते हैं कि कॉलोनाइज़र का कहना है –
“हम छोटे-छोटे प्लॉट में मकान बना रहे हैं, इसमें विभागीय अनुमति की आवश्कता नहीं होती हैं।” असलियत यह है कि यह बहाना सिर्फ लोगों को गुमराह करने और कानूनी कार्रवाई से बचने की चाल है। और करोडो की राजस्व को चोरी का है जहाँ पर
प्रशासन और नेताओं की चुप्पी – कही न कही मिलीभगत के संकेत नजर आ रहें ?

सवाल उठते हैं –

क्या नगर निगम जबलपुर और टीएनसीपी जबलपुर को भनक क्यो नहीं? क्या नेताओं और अफसरों की मिलीभगत से ही यह कारोबार फल-फूल रहा है? और अगर भनक है तो ये कार्यवाही करने से क्यों पीछे हट रहे क्या ये सब राजनीति संरक्षण में चल रहा हैं। जो जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
जनता के लिए चेतावनी

वही जनता बिना लिखित अनुमति और रजिस्ट्री सत्यापन के कोई सौदा न करें।
विज्ञापन, गारंटी और ऑफर्स पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
धोखाधड़ी की स्थिति में नजदीकी तुरंत FIR दर्ज कराएं।

अब निगाहें नए प्रशासन पर

जबलपुर की जनता अब नए कलेक्टर और नए कमिश्नर की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।

क्या वे भूमाफिया और कॉलोनाइज़र के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे?

क्या निगम और टीएनसीपी अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
क्या जबलपुर को अवैध कॉलोनियों से मुक्त करने का अभियान शुरू होगा?

यह सिर्फ एक कॉलोनी का मामला नहीं, बल्कि जबलपुर में फैले अवैध कॉलोनियों के संगठित रैकेट का हिस्सा है।
अगर नए कलेक्टर और नए कमिश्नर ने सख्त कार्रवाई की तो यह जनता के विश्वास की जीत होगी। वरना यह “काला बाज़ार” आगे भी चलता रहेगा और हर बार सपनों का घर खरीदने वाले लोग लुटते रहेंगे।
आखिरकार कब जागेंगे जिले के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि और कब तक रोक लग पायेगी ये अवैध प्लाटिंग कर लोगों को लूटने वालो पर बड़ा सवाल

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