अहमदाबाद आश्रम ज़मीन विवाद: गुजरात सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज

Revanchal
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​सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेकर दर्ज की याचिका (क्र. 55297/2026); सुनवाई लंबित रहने तक प्रशासन की कार्रवाई होगी ‘कोर्ट की अवमानना’

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा

देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र, संत आशाराम आश्रम अहमदाबाद के ज़मीन मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। गुजरात प्रशासन के खिलाफ अब देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में मोर्चा खोल दिया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू ने स्वयं उच्चतम न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर विधि सम्मत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दर्ज कर ली है। इस याचिका को क्रमांक 55297/SCI/PIL/2026 दिया गया है।

​प्रशासन कर रहा मानवाधिकार कानूनों की अवहेलना, हमारे पास हैं वैध दस्तावेज़’
​याचिकाकर्ता भगवानदीन साहू ने आरोप लगाया है कि अहमदाबाद महानगर पालिका एक सोची-समझी साज़िश के तहत आश्रम की ज़मीन खाली करवाने के लिए बार-बार असंवैधानिक नोटिस दे रही है। उन्होंने दावा किया कि
​आश्रम प्रबंधन के पास उक्त ज़मीन के सभी वैधानिक और वैध दस्तावेज़ उपलब्ध हैं।
​गुजरात प्रशासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के उन कानूनों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है, जो दुनिया के सभी देशों के लिए बंधनकारी हैं।
​यह कृत्य करोड़ों साधकों की धार्मिक आस्था पर सीधा कुठाराघात है।

सरकार की छवि खराब करने का षड्यंत्र!
​याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि कुछ षड्यंत्रकारी तत्व गुजरात प्रशासन के माध्यम से साधकों और सत्तारूढ़ सरकार को आपस में भिड़ाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान सरकार की छवि को धूमिल करना और आश्रम के सेवा कार्यों को रोकना है।

​जब तक यह प्रकरण माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब तक अहमदाबाद प्रशासन द्वारा आश्रम के खिलाफ की जाने वाली कोई भी दंडात्मक या बेदखली की कार्रवाई ‘माननीय न्यायालय की अवमानना’ मानी जाएगी।
भगवानदीन साहू, याचिकाकर्ता व सामाजिक कार्यकर्ता

​विश्वभर में फैला है सेवा कार्यों का साम्राज्य
​इस मुख्य आश्रम से प्रेरित होकर देश-विदेश में मानवता और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए विशाल स्तर पर सेवा कार्य चलाए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं
सेवा कार्य का विवरण वर्तमान आंकड़े / प्रभाव
वैश्विक नेटवर्क
देश में 450 आश्रम और विश्व के 167 देशों में साधक
शिक्षा और संस्कार18 हजार बाल संस्कार केंद्र और सैकड़ों गुरुकुल संचालित
मातृ-पितृ पूजन दिवस14 फरवरी को देशभर में 74 करोड़ माता-पिता का पूजन
पर्यावरण संरक्षण इस वर्ष देश में 4 लाख स्थानों पर तुलसी पूजन का आयोजन
सामाजिक सरोकारआदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में प्रतिवर्ष विशाल भंडारे और सहायता
अमेरिका की विधानसभा से मिला सर्वोच्च सम्मान बेगुनाही का सबूत!
​याचिका में तर्क दिया गया है कि इन जनहित और सेवा कार्यों की गूंज वैश्विक स्तर पर है। वर्ष 2019 में, जब पूज्य बापू जोधपुर जेल में थे, तब दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका की कैलिफोर्निया विधानसभा ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था। साधकों का मानना है कि इतनी बड़ी वैश्विक महाशक्ति द्वारा सम्मानित किया जाना ही पूज्य बापूजी की बेगुनाही का सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण है।
​फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस जनहित याचिका को गंभीरता से लेते हुए दर्ज किए जाने की सूचना याचिकाकर्ता को एसएमएस (SMS) के माध्यम से मिल चुकी है, जिससे करोड़ों साधकों में न्याय की उम्मीद जागी है।

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