तीसरी संतान बनी सरकारी नौकरी पर भारी, उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार सेवा से बर्खास्त

Revanchal
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26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर लागू हुआ नियम

विभागीय जांच में आरोप पाए गए सही

z | मध्यप्रदेश शासन ने सिंगरौली जिले में पदस्थ उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई। यह मामला प्रदेश में एक बार फिर दो-संतान संबंधी सेवा नियमों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अशोक सिंह परिहार के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई थी कि उन्होंने शासकीय सेवा में रहते हुए निर्धारित कटऑफ तिथि के बाद तीसरी संतान होने की जानकारी विभाग से छिपाई है। शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई गई।

विभागीय जांच में हुई पुष्टि

कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन में पुष्टि की कि संबंधित अधिकारी की तीन संतान हैं तथा तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की गई।

क्या कहता है नियम?

मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर व्यक्ति शासकीय सेवा के लिए अपात्र माना जाता है। शासन द्वारा परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह प्रावधान लागू किया गया था।

इसी नियम के तहत महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक कार्यालय द्वारा उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया।

सरकारी सेवकों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

यह कार्रवाई शासकीय सेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा रही है कि सेवा नियमों का पालन अनिवार्य है तथा किसी भी तथ्य को छिपाने की स्थिति में विभागीय जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, संबंधित अधिकारी को कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों और अपील का अधिकार प्राप्त रहेगा।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में दो-संतान संबंधी नियम लंबे समय से लागू हैं और समय-समय पर विभिन्न विभागों में इन नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई होती रही है। इस केश की पैरवी वरिष्ठ उच्चन्यायालय जबलपुर के अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल की है ।

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