रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए चलाई जा रही जनमन योजना अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। ग्राम पंचायत अमदरा के पोषक ग्राम कुई में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई सड़क निर्माण के कुछ ही समय बाद उखड़ने लगी है। सड़क की डामर परत जगह-जगह से गायब हो रही है, गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ग्रामीण खुलकर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। सड़क की हालत देखकर लोगों का कहना है कि यह सड़क विकास की नहीं, बल्कि सरकारी धन की बंदरबांट की कहानी बयां कर रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सड़क निर्माण में शुरू से ही गुणवत्ता को ताक पर रख दिया गया। निर्माण कार्य पूरा होते ही सड़क की परत उखड़ने लगी, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि या तो घटिया सामग्री का उपयोग किया गया या फिर तकनीकी मानकों की खुली अनदेखी की गई। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य नियमानुसार हुआ होता तो नई सड़क इतनी जल्दी दम नहीं तोड़ती।
डामर उखड़ी तो सीमेंट से लीपापोती शुरू
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क खराब होने के बाद दोष सुधारने के बजाय मरम्मत के नाम पर सीमेंट डालकर खानापूर्ति की गई। सवाल यह है कि डामर सड़क में सीमेंट के पैबंद लगाकर आखिर किस नियम का पालन किया गया लोगों का कहना है कि यह मरम्मत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण में हुई अनियमितताओं को छिपाने के लिए जिम्मेदार लोग ताबड़तोड़ लीपापोती में जुटे हुए हैं, लेकिन सड़क की बदहाल तस्वीरें पूरी कहानी बयां कर रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो कई साल पुरानी सड़क हो, जबकि निर्माण को अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता।
क्या कागजों में बनी मजबूत सड़क, जमीन पर निकली खोखली
गांव में चर्चा है कि सड़क निर्माण में सरकारी राशि तो पूरी खर्च दिखाई गई होगी, लेकिन गुणवत्ता कहीं नजर नहीं आ रही। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलकर कागजों में मजबूत सड़क खड़ी कर दी और जमीन पर घटिया निर्माण कर सरकारी धन का खेल कर दिया।
लोगों का कहना है कि जनमन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा देना है, लेकिन यहां तो सड़क बनने के बाद ही बिखरने लगी। इससे न केवल योजना की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि शासन के विकास कार्यों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय निगरानी पर भी सवाल
सड़क निर्माण कार्य विभागीय देखरेख में हुआ, इसके बावजूद इतनी बड़ी खामियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण किया गया था क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ तो सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ गई
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। न तो किसी प्रकार की जांच शुरू हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई दिखाई दे रही है। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
गांव के लोगों ने सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण में उपयोग की गई सामग्री के नमूने जांचे जाएं, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि आखिर सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे हुई।
ग्रामीण मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे है उनका कहना है कि विकास के नाम पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
जनमन योजना या जनधन की लूट
कुई गांव की उखड़ी सड़क अब कई बड़े सवाल छोड़ रही है। आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़क टिकाऊ क्यों नहीं बनी किसके संरक्षण में गुणवत्ता से समझौता हुआ किसने निर्माण कार्य को हरी झंडी दी और सड़क उखड़ने के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई
फिलहाल सड़क की उखड़ी परतें और बाहर निकली गिट्टियां विकास के दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में जांच कर दोषियों को बेनकाब करता है या फिर यह सड़क भी भ्रष्टाचार की धूल में दबकर रह जाएगी।
