पत्रकार से व्हाट्स ऐप कॉलिंग पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाले सहायक पुलिस उपनिरीक्षक को आखिर कौन दे रहा संरक्षण!
क्यों थाना प्रभारी बने है मूकदर्शक
नवभारत धनपुरी शहडोल
प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर इस जिले में जो भी आता है यही का होकर रह जाता है उसमे एक नाम है धनपुरी थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक भूपेंद्र कुमार अहिरवार का यह वह नाम है जो लगातार विवादों में रहता है जिले में इनकी तैनाती पिछले 14 वर्षों से अधिक समय से है जो की कई प्रकार के प्रश्न चिन्ह पुलिस महकमे के ऊपर खड़े करती हैं भूपेंद्र कुमार अहिरवार कई सालों से जिले में केवल एक ही अनुभाग में पदस्थ है वह अनुभाग है धनपुरी पुलिस अनुभाग लगातार इनकी एक ही अनुभाग में मौजूदगी से इनके कुछ विशेष संबंध यहां के तथाकथित समाजसेवियों और माफियाओं से प्रगाढ़ हो चुके हैं सम्पूर्ण धनपुरी थाना क्षेत्र जानता है और यहां पर लोग चाय पर चर्चा करते हुए कहते हैं की असली थाना प्रभारी तो भूपेंद्र है साहब तो बस नाम मात्र के प्रभारी हैं चूंकि पुलिस का कार्य होता है निष्पक्षता और जांच में पारदर्शिता और एक व्यक्ति जब पुलिस की वर्दी पहनता तो उसकी जिम्मेदारी दस गुना और बढ़ जाती है लेकिन इसके विपरित जब कोई अपने पद और अपनी वर्दी का दुरुपयोग करने लग जाए तो समझ जाना चाहिए की यह व्यक्ति लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ है खैर पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता शायद उस दिन टूटे जब धनपुरी थाना क्षेत्र में कोई बड़ी घटना घटित हो जाए और अगर घटित होती भी है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत जुआ कबाड़ सट्टा अवैध उत्खनन और परिवहन लगातार चरम पर है साथ ही धनपुरी पूरी तरह से मेडिसिन और सिरप स्वरूपी नशे में डूबती जा रही है धनपुरी में नशे के इंजेक्शन का कारोबार हो या प्रतिबंधित सिरप कोरेक्स ओनरेक्स जैसे मादक दवाइयां सभी की बिक्री पुलिसिया संरक्षण में चरम पर है और इन सब का गुनहगार केवल गुनाहों का देवता है जिसके कंधे पर एक स्टार जिम्मेदारी के लिए हो वह अगर लापरवाही और अवैध कारोबारियों के साथ चाय पर चौराहे पर मंत्रणा करने लग जाए तो बताइए फिर उस थाना क्षेत्र का क्या हाल होगा…
आरक्षक से लेकर सहायक उपनिरीक्षक तक का सफर पदोन्नति हुई लेकिन जिला नही बदला
सबसे हास्यास्पद बात यह है और शहडोल पुलिस के लिए चिंतनीय भी कि एक पुलिस कर्मी जिसकी तैनाती आरक्षक के रूप में शहडोल जिले में हुई थी वह समय के साथ सहायक उपनिरीक्षक पदोन्नति तक का सफर तय करता है लेकिन उसको आवंटित किया गया जिला नही बदलता यह वाकई में गंभीर चूक है या पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से भूपेंद्र कुमार अहिरवार लगातार एक जगह पर ही रहकर अपनी अमानवीय कार्यशैली से सबको भ्रमित करता रहेगा खैर जो भी शहडोल पुलिस प्रशासन को इस बात का जवाब तो देना ही होगा की क्या मध्य प्रदेश पुलिस की नवीन तबादला नीति 2026 का शहडोल पुलिस पालन नहीं करती क्या शहडोल पुलिस के संवेदनशील जिम्मेदार अधिकारियों का एएसआई भूपेंद्र कुमार अहिरवार के साथ कोई प्रगाढ़ संबंध है क्या सबके लिए बनाई गई नीतियां भूपेंद्र के लिए लागू नहीं होती क्या डीजीपी मध्य प्रदेश श्री कैलाश मकवाना के आदेशों का शहडोल पुलिस अक्षरशः पालन नहीं करती यह कुछ सवाल है शहडोल पुलिस से जिसका जवाब शहडोल पुलिस को देर सवेर देना ही पड़ेगा
शहडोल संभागायुक्त से हुई व्यापक शिकायत
आईजी शहडोल रेंज के बाद पत्रकार अंकित गुप्ता को अभद्र भाषा में धमकी देने वाले विवादित एएसआई की शिकायत अब संभाग के प्रशासन की मुखिया संवेदनशील कार्यों का नियमानुसार संपादन करने वाली वरिष्ठ आईएएस सुरभि गुप्ता के पास हुई है उन्होंने संबंधित मामले में कार्यवाही हेतु बात कही है और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुए प्रहार की कड़ी निन्दा की है
धनपुरी अमलाई बुढार की जनता एवं बुद्धिजीवी वर्ग साथ ही पत्रकार संगठनों ने विवादित एएसआई भूपेंद्र कुमार अहिरवार के खिलाफ नवागत पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल से कड़ी कार्यवाही करते हुए उन्हें शहडोल जिले से प्रथक करने की मांग की है और कहा है की लंबे समय से एक ही जिले में लगातार एक पुलिस कर्मी का बने रहना जिले की सुरक्षा एवं जिलेवासियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक सिद्ध हो सकता है
