भरोसा गिरा, सिस्टम सोया —? शिक्षा के मंदिर अब खंडहरों में तब्दील!

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Confidence has fallen, the system is asleep—?The temples of education are now in ruins!

रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले के सरकारी स्कूलों की हालत लगातार चेतावनी की स्थिति में पहुंच चुकी है।
कहीं छत टपक रही है, कहीं दीवारें झुक चुकी हैं, तो कहीं बच्चों को स्कूल भवन के बजाय खुले मैदान या दूसरे कमरों में पढ़ाया जा रहा है।

  • सबसे चिंताजनक स्थिति संपूर्ण मंडला जिले के सरकारी स्कूलों की सामने आई है।
  • यहां स्कूल भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और छत से पानी टपकने के कारण शिक्षक बच्चों को भवन के बाहर दूसरी जगह बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं।
  • बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल के अंदर बैठाना खतरे से खाली नहीं है।
  • माता-पिता लगातार चिंता जता रहे हैं कि “कहीं कोई हादसा न हो जाए।
  • कागज़ों में रखरखाव, ज़मीन पर खंडहर!
  • मंडला जिले के इमलीगोहान भटियाटोला, भटिया, खैरमाई, ठीठरा और जनपद पंचायत नैनपुर के ग्राम परसवाड़ा स्कूलों में भवन जर्जर हालत में हैं, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल कागज़ी खानापूर्ति की जा रही है।
  • हर साल रखरखाव और रंग-रोगन के लिए लाखों की राशि स्वीकृत होती है, पर सवाल यह है कि —
  • वह राशि आखिर खर्च कहां हो रही है?
  • क्यों नहीं हो रहा निरीक्षण और भौतिक सत्यापन?
  • जमीनी हकीकत यह है कि भवनों की मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा, और बच्चों को टूटी दीवारों के साए में पढ़ने के लिए छोड़ दिया गया है।

शिक्षा के मंदिर या मौत के
ढांचे?

  • हाल ही में राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्कूल की छत गिरने से मासूम बच्चे मलबे में दब गए।
  • अब वही डर मंडला में मंडरा रहा है — यहां कई स्कूलों की छतें कभी भी गिर सकती हैं।
  • कहीं शिक्षक खुद छत के नीचे खड़े होने से बचते हैं, तो कहीं बच्चे दीवार से दूरी बनाकर पढ़ते हैं।

क्या प्रशासन तब जागेगा जब किसी मासूम की चीखें दीवारों से टकराकर लौट आएंगी?
कौन लेगा जिम्मेदारी जब कोई हादसा होगा?

जनता और अभिभावकों की मांग:

  • मंडला जिले के सभी सरकारी स्कूलों का भौतिक सत्यापन तत्काल किया जाए।
  • जर्जर भवनों की मरम्मत युद्धस्तर पर की जाए। स्कूलों में सुरक्षित कक्षाएं, शौचालय और खेल मैदान की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
  • भवन रखरखाव में भ्रष्टाचार और लापरवाही की जांच की जाए।
  • अब वक्त है कि प्रशासन फाइलों से निकलकर ज़मीनी सच्चाई देखे।
  • क्योंकि अब सिर्फ दीवारें नहीं गिर रहीं — भरोसा गिर रहा है, सिस्टम गिर रहा है!
  • और जब भरोसा गिरता है, तो उसका मलबा मासूमों के भविष्य पर गिरता है।
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