राममंदिर में गूंज रही भक्ति रस की धारा, रामकथा के तीसरे दिन भी उमड़ी श्रोताओं की भीड़,

Revanchal
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हर मां का बेटा बने राम :: प.कालका प्रसाद शास्त्री

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – राममंदिर समिति एवं सकल साहू समाज के तत्वाधान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में रामकथा का रसपान किया। परमपूज्य कथावाचक कालका प्रसाद शास्त्री के मुखारविंद से आज हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।


राममंदिर परिसर में प्रतिदिन हो रहे प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। विशेष रूप से माता-बहनों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कथा रामनवमी तक निरंतर चलेगी, जिसमें धर्मलाभ लेने के लिए जनसमूह उमड़ रहा है।


कथावाचक ने हिरण्यकश्यप को प्राप्त वरदान का वर्णन करते हुए बताया कि उसने कठोर तपस्या कर देवताओं से ऐसा वरदान प्राप्त किया था, जिसके कारण वह न दिन में मरे, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर, न किसी मनुष्य से, न किसी पशु से, न किसी अस्त्र से, न शस्त्र से। इसी अहंकार में वह स्वयं को ईश्वर समझने लगा, लेकिन अंततः भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर उसके अहंकार का नाश किया।


प्रह्लाद की भक्ति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से भगवान हर जगह विद्यमान हैं—“हरि व्याप्त सर्वत्र समाना”। प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का नाम नहीं छोड़ा और अंततः उसकी भक्ति ने उसके पिता को भी मुक्ति दिलाई।


कथावाचक ने संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि हर मां चाहती है कि उसका बेटा भगवान राम जैसा बने, लेकिन इसके लिए गर्भावस्था से ही अच्छे संस्कार देना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रह्लाद की माता गर्भावस्था में भगवान का नाम जपती थीं, जिसका प्रभाव बालक पर पड़ा। संतों का सानिध्य जीवन को बदल देता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करना चाहिए।


उन्होंने वर्तमान समय पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल मोबाइल और कार्टून में उलझकर लोग संस्कारों से दूर हो रहे हैं, जिसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ रहा है। बच्चों में अच्छे संस्कार देना माता-पिता की जिम्मेदारी है।
कथावाचक ने कहा कि इंसान अपने दुख से उतना दुखी नहीं होता, जितना दूसरों के सुख को देखकर होता है। प्रतिस्पर्धा की भावना ही दुःख का कारण बनती है, जबकि जिसके मन में भगवान राम का वास होता है, वही सच्चा सुखी होता है।


उन्होंने देहरी (मर्यादा) का महत्व बताते हुए कहा कि घर की मर्यादा में ही ईश्वर का वास होता है। संतों का सानिध्य जीवन की बिगड़ी बना सकता है और भक्ति मार्ग ही सच्चा मार्ग है।


कार्यक्रम के अंत में जानकारी दी गई कि रविवार को रामजन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील की।

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