गोपालपुर के जर्जर ग्रामपंचायत भवन में जिम्मेदारी निभा रहे कर्मचारी

Revanchal
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कई महीनों से वेतन भी नहीं मिला

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – करंजिया विख . की ग्राम पंचायत गोपालपुर का पंचायत भवन इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है—दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, छत और दीवारों का पलस्तर उखड़कर गिर रहा है, जिससे यह भवन खंडहर जैसा नजर आने लगा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब भवन के अंदर बैठना तक मुश्किल हो जाता है।

पंचायत कर्मचारियों को ऐसे खतरनाक माहौल में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भवन के नीचे बैठकर ड्यूटी निभाना उनके लिए किसी जोखिम से कम नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि हर समय हादसे का डर बना रहता है, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।


ग्रामीणों और कर्मचारियों के अनुसार, नए पंचायत भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को भेजा जा चुका है, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।

वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानी

पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति और भी चिंताजनक है। रोजगार सहायक वर्तमान में सचिव का प्रभार संभाल रहे हैं, वही उनके अन्य प्रभार में समीपी ग्राम पंचायत खम्हारखुदरा का भी भार है लेकिन उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के बीच कार्य करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।


इसके अलावा पंचायत में मोबाइलाइजर के रूप में कार्यरत महिला कर्मचारी और चौकीदार को भी कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है।

सरपंच के त्यागपत्र से ठप पड़े काम

बताया गया है कि करीब एक माह पहले यहां की महिला सरपंच ने किन्हीं कारणों से पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद से पंचायत का कामकाज प्रभावित हो गया है और कई जरूरी भुगतान लंबित पड़े हुए हैं।
हालांकि, वर्तमान में एक महिला पंच ने सरपंच की जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन पंचायत के वित्तीय लेनदेन शुरू होने के लिए बैंकिंग प्रक्रिया और डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) का सत्यापन पूरा होना जरूरी है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पंचायत के खाते से कोई भुगतान संभव नहीं है।

वित्तीय वर्ष के अंत में बढ़ी मुश्किलें

वर्तमान में वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना चल रहा है और अप्रैल से नया सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में पंचायत के लंबित हिसाब-किताब और भुगतान निपटाने में कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नए भवन की स्वीकृति देने और कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान कराने की मांग की है, ताकि पंचायत का कामकाज सुचारू रूप से संचालित हो सके

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