रेवांचल टाइम्स बीजाडांडी मंडला खेती को घाटे का सौदा मानने वाले किसानों के लिए विकासखंड बीजाडांडी के ग्राम लावर मुड़िया की प्रगतिशील महिला कृषक गीता तेकाम एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के समन्वय से उन्होंने न केवल अपनी खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को भी नई दिशा देने का कार्य किया है।
श्रीमती गीता तेकाम ने कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में विभिन्न कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर खेती की नवीन तकनीकों को सीखा और उन्हें अपने खेतों में सफलतापूर्वक अपनाया। उन्होंने जैविक खेती, उन्नत बीज चयन, पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक कीट नियंत्रण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया। इन तकनीकों के प्रयोग से उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
गीता तेकाम की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने परंपरागत फसलों के साथ-साथ बाजार में बढ़ती मांग वाली सुपर फूड फसलों की खेती भी शुरू की। उन्होंने अपने खेतों में चिया सीड और किनोवा जैसी उच्च पोषणयुक्त फसलों का उत्पादन कर यह साबित किया कि किसान यदि समय के साथ नई फसलों और तकनीकों को अपनाएं तो बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
इन फसलों की खेती से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ बाजार में नई पहचान भी मिली।प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने जीवामृत, जैविक खाद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर उन्होंने खेती की लागत में कमी लाई और मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखा।
बहुफसली खेती पद्धति अपनाकर उन्होंने जोखिम को कम किया तथा खेतों से सालभर उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफलता हासिल की।उनकी उपलब्धियों का प्रभाव केवल उनके खेत तक सीमित नहीं रहा। गीता तेकाम ने अपने अनुभवों को अन्य किसानों के साथ साझा करते हुए क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने लगभग 125 किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उनके मार्गदर्शन से कई किसान अब रासायनिक खेती से हटकर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के समन्वय से गीता तेकाम की कृषि आय में लगभग दो से तीन गुना तक वृद्धि हुई है। उनकी मेहनत, नवाचार और सीखने की निरंतर इच्छा ने उन्हें क्षेत्र की अग्रणी महिला कृषकों में शामिल कर दिया है।आज गीता तेकाम न केवल एक सफल कृषक हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर कृषि की मिसाल भी हैं।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को अपनाएं तो खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धियां मंडला जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं और कृषि क्षेत्र में नवाचार की नई संभावनाओं को भी मजबूत कर रही हैं।
