ग्राम पंचायत कोको में शासन के नियम ताक पर, ग्रामीण परेशान
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले की जनपद पंचायत भुआ बिछिया की ग्राम पंचायतों में मनमानी और लापरवाही का खेल चल रहा हैं, ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं का हाल लगातार बदहाल होता जा रहा है। ताज़ा मामला जनपद पंचायत बिछिया अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको का है, जहां रोजगार सहायक प्रहलाद साहू पंचायत भवन छोड़ अपने घर से शासकीय कार्य संचालित कर रहे हैं।
सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जब पंचायत भवन शासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया है, तो फिर सरकारी काम निजी घर से क्यों चलाया जा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जॉब कार्ड बनवाने, मस्टरोल में नाम जुड़वाने, भुगतान संबंधी जानकारी लेने और शिकायत दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों को पंचायत भवन में ताला मिलता है, जबकि “सरकारी बाबू” घर बैठकर काम निपटा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों को इस अव्यवस्था की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर आंख मूंदकर देखा जा रहा है? अगर पंचायत भवन में कार्यालय संचालित नहीं होगा तो पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी? आखिर किस नियम के तहत शासकीय अभिलेख और दस्तावेज निजी घर में रखे जा रहे हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन में रोजगार सहायक की अनुपस्थिति के कारण योजनाओं में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की आशंका भी बढ़ रही है। मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जो गरीब मजदूरों के रोजगार का सहारा है, वह भी लापरवाही और मनमानी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
अब सवाल सीधे प्रशासन पर खड़ेओ हो रहे हैं —
क्या जिला प्रशासन और जनपद पंचायत केवल कागजों में मॉनिटरिंग कर रहे हैं?
क्या पंचायतों में बैठे कर्मचारी अपनी सुविधा से सरकारी व्यवस्था चलाएंगे?
और अगर यही हाल रहा तो ग्रामीण आखिर न्याय के लिए कहां जाएं?
ग्रामीणों ने कलेक्टर मंडला और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बिछिया से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर रोजगार सहायक को पंचायत भवन में नियमित रूप से कार्यालय संचालित करने के निर्देश दिए जाएं, अन्यथा ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
