मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल महाकौशल-छत्तीसगढ़ रेल कॉरिडोर का 22 साल का इंतज़ार, क्या अब खत्म होगा वनवास?

Revanchal
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दैनिक रेवाँचल टाईम्स – “80 साल पुराना सपना और 22 साल पहले रेलवे द्वारा किया गया वादा—आखिर कब तक इंतज़ार करेगा महाकौशल और छत्तीसगढ़ का आदिवासी अंचल?”

1944 के मांग और 2004-2003 की सर्वे रिपोर्ट को लेकर मंडला के रेल एक्टिविस्ट के दवारा पंडरिया मंडला जबलपुर रेल लिंक का भेजा गया प्रस्ताव

बिलासपुर/मंडला/जबलपुर:-
मध्य भारत के सबसे प्रतीक्षित रेल मार्ग ‘बिलासपुर-मुंगेली-पंडरिया-बिछिया-मंडला-जबलपुर’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने रेलवे बोर्ड के ही 22 साल पुराने एक ‘स्पेशल क्लॉज’ को हथियार बनाकर इस परियोजना को पुनर्जीवित करने की मुहिम छेड़ दी है।

रेलवे के अपने वादे ने दी मुहिम को नई धार

दस्तावेजों के अनुसार, 2003-04 में जब बिलासपुर-मंडला-जबलपुर (372 किमी) लाइन का सर्वे हुआ था, तब रेलवे बोर्ड ने कम मुनाफे (ROR) का हवाला देते हुए इसे स्थगित किया था। लेकिन, बोर्ड के आदेश (दिनांक 12.05.2004) में एक महत्वपूर्ण शर्त थी: “इस परियोजना की 10 साल बाद पुनः समीक्षा की जा सकती है”।

यह मियाद 2014 में ही पूरी हो चुकी है, जिसके आधार पर अब ‘अपडेटेड ट्रैफिक सर्वे’ की मांग उठाई गई है

बिलासपुर मंडला जबलपुर 12-14% ROR की प्रबल संभावना: राजनांदगांव मंडला जबलपुर सर्वे बना आधार

मुहिम के पीछे सबसे बड़ा तर्क आर्थिक व्यवहार्यता है। नितिन सोलंकी रेल एक्टिविस्ट द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:
राजनांदगांव-मंडला-जबलपुर (2016) के सर्वे में इस अंचल का ROR (+)1.73% आ चुका है
*चूंकि पंडरिया तक रेल विस्तार का काम पहले से ही योजना में है, इसलिए पंडरिया से बिछिया-मंडला-जबलपुर को जोड़ना अब एक ‘Isolated Proposal’ नहीं बल्कि एक ‘Missing Link’ है।

रेलवे के विशेषज्ञों और रेल एक्टिविस्ट का दावा है कि वर्तमान औद्योगिक और कृषि विकास को देखते हुए, नए सर्वे में ROR 12% से 14% तक पहुंचने की पूरी उम्मीद है, जो किसी भी रेल परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्याप्त है।

इन स्टेशनों की बदल सकती है तकदीर
प्रस्तावित मार्ग बिलासपुर, मुंगेली, पंडरिया, मोतीनाला, बिछिया, अंजनिया,माधोपुर, नया मंडला, सागर,चिरईडोगरी , सौंधर ,बीजाडांडी, परारिया भेड़ाघाट और जबलपुर को आपस में जोड़ेगा। यह मार्ग न केवल इन दोनों बड़े शहरों के बीच की दूरी 100 किमी से भी कम करेगा, बल्कि कान्हा नेशनल पार्क के समीपवर्ती क्षेत्रों और आदिवासी अंचल के आर्थिक विकास के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगा।

मंत्रालय तक पहुंची मांग

इस संबंध में रेल मंत्रालय जनहित की याचिका में औपचारिक शिकायतें (MORLY/E/2026/0021154 और 0021155) दर्ज कराई जा चुकी हैं।

मांग स्पष्ट है—रेलवे अपने पुराने वादे के मुताबिक तत्काल ‘रिव्यू सर्वे’ के आदेश जारी करे और इसे ‘नेशनल प्रायोरिटी कॉरिडोर’ (नर्मदा मैकलसुता भोरमदेव रेल कॉरिडोर के रूप में विकसित ) में शामिल करे।

— “यह रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेजों और रेल मंत्रालय में दर्ज औपचारिक शिकायतों पर आधारित है। अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड के तकनीकी सर्वे के अधीन है।”

जनता की मांग:-सरकार को मालूम था कि 2012-13 में सर्वे होना था क्यों नहीं हुआ हमारे जनप्रतिनिधि सांसद ,राज्यसभा सांसद – विधायक लोगों ने कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन अब तो ध्यान दे सकते हैं ना अपडेटेड ट्रैफिक सर्वे की मांग को पूरा किया जाए

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