जबलपुर में प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल
रेवांचल टाइम्स, जबलपुर
जबलपुर में अवैध कॉलोनियों का फैलता जाल शहर की आबोहवा, बुनियादी ढांचे और आम जनता के हक पर सीधा हमला है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन का तराजू बराबरी से नहीं झूल रहा।
एक तरफ कुछ लोगों की कॉलोनियों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ प्रभावशाली लोगों की कॉलोनियों को न केवल नजरअंदाज किया जा रहा है, बल्कि उन पर “शॉर्टकट बुक” की तरह संरक्षण भी मिल रहा है।
कानून सबके लिए एक जैसा, लेकिन…
नियम स्पष्ट हैं — बिना अनुमति, बिना नक्शा पास कराए या बुनियादी सुविधाओं के बिना बनी कॉलोनियां अवैध हैं। परंतु जब कार्रवाई की बात आती है तो प्रभावशाली राजनैतिक संबंध रखने वाले, विभागीय संपर्क वाले या पैसों के दम पर खेल करने वाले बिल्डरों पर हाथ डालने से अधिकारी बचते नजर आते हैं।
सूत्र बताते हैं कि कई अवैध कॉलोनियों की शिकायतें महीनों से नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) और जिला प्रशासन के पास लंबित हैं, लेकिन “विशेष कारणों” से फाइलों को दबा दिया जाता हैlशहरवासियों का कहना है कि जब कानून के दायरे में आने वाले गरीब और छोटे बिल्डरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई होती है तो वहीं बड़े नाम और रसूखदार बिल्डरों को पहले से ही सूचना देकर बचा लिया जाता है।
लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि कुछ मामलों में विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर सिर्फ औपचारिक नोटिस थमाते हैं और बाद में रिपोर्ट में “काम बंद” दिखाकर मामला रफा-दफा कर देते हैं।

शॉर्टकट की बुक’ –अवैध कॉलोनियों का नया खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ प्रभावशाली कॉलोनी मालिकों ने विभागीय स्तर पर अनौपचारिक ‘सेटिंग’ कर रखी है।
इस सेटिंग के तहत—
निर्माण कार्य पर कोई असली रोक नहीं लगाई जाती।
नोटिस सिर्फ रिकॉर्ड के लिए जारी होते हैं।
जांच टीम को पहले से कॉलोनियों की जानकारी दे दी जाती है।
किसी भी कार्रवाई से पहले “सुरक्षा का इंतजाम” कर लिया जाता है।
प्रशासन की सफाई और जनता का सवाल
जब इस बारे में नगर निगम और टीएनसीपी अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि “हम सभी पर समान रूप से कार्रवाई कर रहे हैं”। लेकिन सवाल ये है कि अगर कार्रवाई सच में बराबरी से हो रही है, तो कुछ अवैध कॉलोनियां महीनों से बिना रोक-टोक क्यों चल रही हैं?
विशेषज्ञों की राय
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का पैमाना एक समान न होने से न केवल अव्यवस्था फैलती है, बल्कि कानून पर से जनता का भरोसा भी उठता है।
वे सुझाव देते हैं कि:
- कार्रवाई की सूची और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- सभी कॉलोनियों की स्थिति ऑनलाइन अपडेट हो।
- जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय हो।
अवैध कॉलोनियों का यह “दोहरे मानदंड” वाला खेल अगर इसी तरह चलता रहा, तो आने वाले समय में जबलपुर की प्लानिंग और कानून व्यवस्था दोनों ही बर्बाद हो जाएंगी।
कानून के सामने सब बराबर हैं — यह नारा तब तक खोखला रहेगा, जब तक कार्रवाई का पैमाना भी बराबर नहीं होगा।
