नर्मदा तट के ऐतिहासिक घाट बदहाली के शिकार सोशल मीडिया पर फूटा जनआक्रोश
“करोड़ों की योजनाएं, लेकिन विरासत उपेक्षित”—घाटों के संरक्षण को लेकर उठी व्यापक मांग
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। जीवन दायनी कहे जाने वाली मां नर्मदा की गोद में बसा मंडला नगर अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है। यहां स्थित प्राचीन घाट केवल नदी तक पहुंचने का मार्ग नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सभ्यता, आस्था और सामाजिक जीवन के जीवंत दस्तावेज हैं। हालांकि वर्तमान में अनेक ऐतिहासिक घाट उपेक्षा, जर्जरता और नगर पालिका और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर नागरिकों, समाजसेवियों और जागरूक लोगों ने चिंता व्यक्त करते हुए घाटों के संरक्षण और जीर्णोद्धार घाटों फैली सल्ट हटाने की मांग तेज कर दी है।
फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर लोगों का कहना है कि मंडला के कई प्राचीन घाट आज बदहाल स्थिति में हैं। कहीं सीढ़ियां टूट चुकी हैं तो कहीं सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। कई स्थानों पर साफ-सफाई और रखरखाव का अभाव भी साफ दिखाई देता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन धरोहरों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां मंडला की ऐतिहासिक विरासत से वंचित हो जाएंगी।
मुन्नीबाई धर्मशाला घाट: सेवा और समर्पण का प्रतीक
नर्मदा तट स्थित मुन्नीबाई धर्मशाला घाट को सामाजिक सेवा और जनकल्याण की अद्भुत मिसाल माना जाता है। बताया जाता है कि बुंदेलखंड की समाजसेवी मुन्नीबाई द्वारा यहां धर्मशाला का निर्माण कराया गया था, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को सुविधा मिल सके। वर्षों तक यह स्थान यात्रियों का सहारा बना रहा, लेकिन वर्तमान में घाट और उससे जुड़ी संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण होती जा रही हैं।
रंगरेज घाट: मंडला की सांस्कृतिक पहचान का साक्षी
रंगरेज घाट कभी स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहां की चहल-पहल और रंगरेज समाज की सक्रियता मंडला की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। आज यह घाट भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है और इसके संरक्षण की मांग लगातार उठ रही है।
कई ऐतिहासिक घाटों की स्थिति चिंताजनक
स्थानीय लोगों के अनुसार हनुमान घाट, पिपलेश्वर घाट, सतखंडा घाट, किले घाट, सिंहवाहिनी घाट, नाना घाट, जेल घाट, पुरवा घाट, रामबाग घाट, बनिया घाट, चिरामन घाट और संगम घाट, वैद्य घाट सहित अनेक ऐतिहासिक घाटों को संरक्षण की आवश्यकता है। इन घाटों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, लोककथाएं और ऐतिहासिक घटनाएं मंडला की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं।
महिष्मति घाट का उदाहरण, अन्य घाटों के लिए भी बने योजना
नागरिकों ने महिष्मति घाट के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों की सराहना करते हुए मांग की है कि इसी तर्ज पर अन्य प्राचीन घाटों के संरक्षण और पुनर्विकास के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उनका कहना है कि विकास केवल नए निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना भी उतना ही आवश्यक है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजों में सांसद, पी एच ई मंत्री, जिला प्रशासन और नगरपालिका परिषद से मांग की गई है कि नर्मदा तट के ऐतिहासिक घाटों का सर्वे कराकर उनके संरक्षण, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष बजट स्वीकृत किया जाए। लोगों का कहना है कि यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि मंडला की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को बचाने का अभियान है।
जनभागीदारी भी जरूरी
नागरिकों ने घाटों की स्वच्छता बनाए रखने, कचरा न फैलाने और नर्मदा तट की पवित्रता बनाए रखने का भी आह्वान किया है। उनका कहना है कि विरासत संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
