प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स | नैनपुर, मंडला
नैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भड़िया में कथित फर्जी बीपीएल राशन कार्ड के मामले ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता शंकरलाल का आरोप है कि पूर्व जनपद सदस्य सियाराम पटेल को जांच में गरीबी रेखा सूची के लिए अपात्र पाए जाने के बावजूद आज तक उनके विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया, जिससे पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।


जांच में अपात्र, फिर भी कार्रवाई शून्य
शिकायत के बाद गठित जांच दल और राजस्व अमले द्वारा की गई जांच में कथित रूप से यह तथ्य सामने आया कि संबंधित व्यक्ति को बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार 14 या उससे कम अंक प्राप्त होना चाहिए था, जबकि जांच में उन्हें 30 अंक प्राप्त पाए गए। इसके आधार पर नाम बीपीएल सूची से हटाने की कार्रवाई भी की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में पात्रता ही समाप्त हो गई और नाम निरस्त कर दिया गया, तो वर्षों तक शासन की योजनाओं का लाभ लेने के मामले में आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या केवल नाम काट देना ही पर्याप्त कार्रवाई है? यदि शासन को आर्थिक क्षति हुई है तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
क्या दोषियों को बचाने में जुटा है प्रशासन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई सामान्य गरीब व्यक्ति छोटी सी त्रुटि कर दे तो उस पर तत्काल कार्रवाई हो जाती है, लेकिन जब मामला प्रभावशाली लोगों का आता है तो फाइलें महीनों और वर्षों तक धूल खाती रहती हैं। यही कारण है कि अब तहसील प्रशासन और जांच से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचने या दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं। यदि जांच रिपोर्ट मौजूद है तो फिर कानूनी कार्रवाई में देरी का कारण क्या है?
सीएम हेल्पलाइन भी बनी औपचारिकता?
न्याय की उम्मीद में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि वहां भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे आम नागरिकों के बीच यह संदेश जा रहा है कि शिकायत तंत्र केवल आंकड़ों और कागजी निपटारे तक सीमित रह गया है।
यदि मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंची शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं होती तो फिर आम जनता आखिर न्याय के लिए कहां जाए? यह प्रश्न प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
परिवार को भी मिला लाभ, जांच क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित फर्जी बीपीएल कार्ड का लाभ केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे परिवार को मिला। आरोप है कि परिवार के अन्य सदस्यों ने भी विभिन्न योजनाओं एवं रोजगार संबंधी लाभ प्राप्त किए।
यदि इन आरोपों में सत्यता है तो संबंधित दस्तावेजों, नियुक्तियों और लाभों की भी स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है। आखिर प्रशासन यह स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच होगी या नहीं?
शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप
मामले का सबसे गंभीर पक्ष यह है कि शिकायतकर्ता ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए हैं। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शिकायतकर्ता के संवैधानिक अधिकारों पर भी हमला माना जाएगा।
लोकतंत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत करना किसी भी नागरिक का अधिकार है। ऐसे में शिकायतकर्ता को डराने या दबाव बनाने की शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और जांच से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अब संदेह को और गहरा रही है। जनता जानना चाहती है कि—
जांच में अपात्र पाए जाने के बाद FIR क्यों नहीं हुई?
शासन को हुई संभावित आर्थिक क्षति की वसूली कब होगी?
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं?
शिकायतकर्ता की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच कौन सुनिश्चित करेगा?
सीएम हेल्पलाइन शिकायत का वास्तविक निराकरण कब होगा?
जनता पूछ रही है—क्या कानून सबके लिए समान है?
भड़िया का यह मामला अब केवल एक राशन कार्ड का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन की कसौटी बन चुका है। यदि जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि प्रभावशाली लोगों के लिए नियम और कानून अलग हैं तथा आम नागरिकों के लिए अलग।
अब निगाहें जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।
(नोट: उपरोक्त समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
