जिम्मेदार अधिकारी मामले में डाल रहें है पर्दा
नैनपुर की धरती पर खुलेआम चल रहा ‘माफिया राज’, सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाकर भू-माफिया ने सरकारी जमीन को बनाया ‘निजी साम्राज्य’
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड नैनपुर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और राजस्व विभाग की मिलीभगत का मामला अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहाँ यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित घोटाले की तरह दिखाई दे रहा है। पूरे सिस्टम को माफियाओं की कठपुतली बनाकर नैनपुर की बेशकीमती जमीनों को लूटा जा रहा है। यहाँ इस महा-घोटाले की परते खोलती जा रही हैं पर जिम्मेदार अधिकारी उन भ्रष्टों पर पर्दा डालने की कोशिश में लगें हुए है और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर केवल जाच या निलबन का पत्र जारी कर लोगो का सांत्वना दे रहे हैं
निलंबन का ‘दिखावा’ और अधिकारियों की ‘साजिश’
प्रशासन ने हाल ही में एक पटवारी को अवैध कॉलोनाइजिंग के नामांतरण में तथ्य छिपाने के आरोप में निलंबित कर अपनी पीठ थपथपाई है, लेकिन यह कार्रवाई महज एक ‘दिखावा’ है। जिस जमीन के नामांतरण पर उसे सस्पेंड किया गया, वहां पहले भी कई नामांतरण हो चुके थे, जो यह साबित करते हैं कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आज का नामांतरण गलत है, तो पिछले नामांतरणों को रद्द करने की हिम्मत प्रशासन क्यों नहीं जुटा पा रहा है? क्या तब के तहसीलदार और अधिकारी पिकनिक मना रहे थे? यह निलंबन केवल एक मोहरे की बलि देकर बड़े अधिकारियों और मास्टरमाइंड को बचाने की सोची-समझी साजिश है, ताकि असली दोषियों के चेहरे बेनकाब न हो सकें।
खसरा नंबर 197/2: सरकारी जमीन, ‘SDM के रिश्तेदार’ का रसूख और प्रशासनिक ‘मौन व्रत’
घोटाले की सबसे भयावह तस्वीर ‘खसरा नंबर 197/2’ के रूप में सामने आई है, जो सरकारी रिकॉर्ड में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज है। इस बेशकीमती जमीन को भू-माफिया ने पहले निजी घोषित करवाया, बाकायदा कब्जा किया और करोड़ों का मुनाफा कमाकर बेच दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि प्रशासन के पास इस जमीन के लिए ‘बेदखली के आदेश’ पहले से मौजूद हैं, जिन्हें फाइलों में धूल फांकने के लिए छोड़ दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि यहां का भू-माफिया खुलेआम खुद को ‘स्थानीय SDM का रिश्तेदार’ बताता है, जिससे राजस्व विभाग के अधिकारियों का मनोबल टूट जाता है या वे माफिया के साथ मिलीभगत के कारण मौन व्रत धारण कर लेते हैं। CM हेल्पलाइन से लेकर थाने तक शिकायतें पहुँचने के बावजूद, कार्रवाई के नाम पर प्रशासन पूरी तरह से ‘शून्य’ है।
पूर्व पटवारी का ‘चमत्कारी’ विकास: वार्ड नंबर 9 की अवैध कॉलोनी का अनकहा सच
इस पूरे भ्रष्टाचार के तंत्र में उमरिया के एक पूर्व पटवारी की भूमिका सबसे विवादास्पद है। वार्ड नंबर 9 की जिस अवैध कॉलोनी में यह पटवारी पार्टनर के रूप में सक्रिय था, वह अवैध होते हुए भी सरकारी फाइलों से रहस्यमयी ढंग से गायब है। जिस पटवारी की आय के स्रोत साधारण होने चाहिए थे, वह आज नई लग्जरी गाड़ियों और सोने की चेन के साथ घूम रहा है, जो उसकी ‘सरकारी कमाई’ का जीता-जागता सबूत है। क्या यह सरकारी फाइलों का कोई जादुई चमत्कार है, या फिर इस पूर्व पटवारी साहब पर किसी उच्च अधिकारी की ‘विशेष कृपा’ बरस रही है, जिसके चलते इनका नाम माफियाओं की उस सूची से बाहर रखा गया है, जिस पर प्रशासन कार्रवाई का ढोंग कर रहा है? इन सब सवालों का जवाब देने में नैनपुर का राजस्व विभाग पूरी तरह विफल रहा है।
सरकारी आदेश कागजों तक सीमित और माफियाओं का कब्जा जमीन तक—क्या यही है नैनपुर का विकास मॉडल?
वही जो प्रशासन ‘बेदखली’ का आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, उसे यह भी सोचना होगा कि कानून का पालन कराने के लिए ‘बुलडोजर’ क्यों नहीं चल रहे? नैनपुर के नागरिक अब केवल तमाशबीन बनकर नहीं रहेंगे। यह खबर प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी है: या तो सिस्टम खुद को सुधारे और सरकारी जमीनों को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराए, वरना ‘सच की आवाज़’ का ये शोर जल्द ही बड़े जन-विस्फोट में बदल जाएगा।
