चार किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्ते को पक्का बनाने की गहराती जनमांग

Revanchal
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बड़झर से औढ़ारी के बीच का नर्मदा परिक्रमा पथ बना हुआ है परिक्रमा वासियों के पांवों को छलनी करने वाला

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला । कहने को तो हर छोटे-बड़े गांवों और कस्बे शहरों को आपस में एक-दूसरे से जोड़ने ग्रामीण पहुंच मार्गों के निर्माण पिछले कुछ वर्षों से बहुत हुए हैं।भले ही उन मार्गों की उम्र या गुणवत्ता का ध्यान शायद किसी निर्माण एजेंसियों ने या विभाग ने रखा हो। कुछ मार्ग तो एक तरफ बनते गए और दूसरी तरफ से उखड़ते भी गए हैं ।

जैसा भी हो रिकार्ड में पक्के सड़क मार्ग बनकर तैयार तो हो चुके हैं पर उन पर चलने पर पता चलता है,कि इससे अच्छा तो पहले की ही स्थिति थी । निवास विकासखंड के मोहगांव ब्लाक के दर्जनों ग्रामीणों की लंबे समय से मांग चल रही है,कि सिंगारपुर और चकदेही को जोड़ने वाला बड़झर से औढ़ारी के बीच नर्मदा नदी के तट पर लगभग चार किलोमीटर लंबा ऐसा मार्ग है,जो बहुत ही व्यस्त रहता है, बावजूद यह बड़े-बड़े पत्थरों और बोल्डरों वाला ऊबड़-खाबड़ है ।

सबसे बड़ी बात तो यह कि यह सबसे महत्वपूर्ण मार्ग नर्मदा पथ है जहाँ इस रास्ते से होते हुए नर्मदा परिक्रमावासियों का आना-जाना हमेशा लगा रहता है। यह तो सभी जानते हैं ,कि अधिकतर नर्मदा परिक्रमा वासी जूते-चप्पल पैर में बिना पहने नंगे पैर चलकर साधना के साथ परिक्रमा करते हैं। ऐसे ऊबड़-खाबड़ रास्ते से चलने में इनकी परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं। इस रास्ते से दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की भी आवाजाही रहती है।

इस सड़क मार्ग के डाम्हलीकरण हो जाने से नर्मदा परिक्रमा वासियों,राहगीरों, ग्रामीण आम जनों को आवाजाही करने में बड़ी सुविधा होगी।

क्षेत्रवासी हेमराज मसराम और समाजसेवी पी.डी.खैरवार ने बताया है,कि पक्के सड़क निर्माण के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण वर्षों से मांग करते आ रहे हैं पर अब तक उनकी मांगों का असर पड़ते दिखाई नहीं दे रहा है। जिससे क्षेत्रवासी ठगे से अनुभव करते अपने जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सरकार पर भी तरह-तरह के सवाल उठाते चर्चा का विषय बनाए हुए हैं।

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