गुरु पूर्णिमा पर्व 29 जुलाई को मुहूर्त मंत्र पूजा और महत्व…. पंडित संदीप ज्योतिष

Revanchal
9 Min Read

दैनिक रेवांचल टाईम्स – गुरु का अर्थ गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सबसे उच्च माना गया है
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि शास्त्रों में गु का अर्थ अंधकार रू का अर्थ हटाने वाला गुरु वह होता है जो आज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है गुरु पूर्णिमा को मनाने का मूल उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा सम्मान और कृतज्ञता का प्रकट करना होता है समानयत दो तरह के गुरु होते हैं प्रथम तो शिक्षा गुरु और दूसरे दीक्षा गुरु शिक्षा गुरु बालक को शिक्षित करते हैं और दीक्षा गुरु शिष्य के अंदर संचित विकारों को निकाल कर उसके जीवन को सत्यपथ की ओर अग्रषित करते हैं

शास्त्रों में गुरु की महिमा

गुरु की महिमा अनंत और अपरंपार है वें ज्ञान के प्रकाश स्तंभ होते हैं जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करते हैं भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और उनके बिना ज्ञान की प्राप्ति असंभव मानी गई है वेदों में गुरु को ब्रह्मा विष्णु और महेश का स्वरूप बताया गया है गुरुब्रह्मा गुरु विष्णु गुरुदेवो महेश्वरा गुरु साक्षात परम ब्रह्म तसमै श्री गुरुवे नमः अर्थात गुरु ही ब्रह्म है गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर हैं ऐसे गुरु क़ो मैं प्रणाम करता हूं गुरु अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है वह सोए हुए को जगाता है भटके हुए को राह दिखाता है स्वार्थ में लगे हुए को परमार्थ के लिए प्रेरित करता है विपत्ति में फंसे हुए का उद्धार करता है निराशा के अंधकार में आशा की ज्योति जगाते हैं जी मानव के जीवन में गुरु का कृपा रहती है वह मानव जीवन धन्य हो जाता है जीवन में कोई भी यज्ञ अनुष्ठान मांगलिक कार्य गुरु की आज्ञा से करना चाहिए क्योंकि गुरु की वाणी से और गुरु के आदेश से समस्त दोष में समाप्त हो जाते हैं और गुरु की वाणी की रक्षा स्वयं भगवान शंकर करते हैं गुरु का दिया हुआ मंत्रके जाप करने से आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है तथा गुरु मंत्र के प्रभाव से किसी भी अनिष्ट का प्रभाव जीवन में नहीं पड़ता ग्रह बाधा भी शांत होती है तथा ईश्वर की प्रसन्नता प्राप्त होती है तथा जीवन में सफलता प्राप्त होती है

गुरु पूर्णिमा तिथि एवं मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार और सूर्य के नक्षत्र उत्तराषाढ़ मैं मनाया जाएगा क्योंकि इस दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे सूर्य का नक्षत्र होने से गुरु पूर्णिमा का विशेष प्रभाव रहेगा यह समय रहेगा की गुरु के कृपा और आशीर्वाद से जीवन में सूर्य की प्रबलता प्राप्त होगी और जीवन तेजो में रहेगा

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः काल स्नान आदि नित्य कर्मों से निर्मित होने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए
पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करने के बाद व्यास जी की प्रतिमा या गुरु जी की प्रतिमा स्थापित करें ताजे फूल या माला चढ़ाए और उसके बाद अपने गुरु के पास जाना चाहिए वस्त्र फल फूल माला अर्पण करने के बाद अपने समर्थ के अनुसार दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए

महर्षि वेदव्यास और गुरु पूर्णिमा का संबंध

पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि धार्मिक ग्रंथो के अनुसार ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में महाभारत श्रीमद् भागवत और 18 पुराण आदि साहित्याओं के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि पर हुआ था जो ऋषि पाराशर की पुत्र थे महर्षि वेदव्यास को तीनों कालों के जाता माना जाता है उन्होंने अपनी दिव्या दृष्टि से यह जान लिया था कि कलयुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि में कमी आएगी धर्म में रुचि कम होने से मनुष्य का ईश्वर के प्रति विश्वास कम कर्तव्य से विमुख और अल्पायु हो जाएगा संपूर्ण वेद का अध्ययन करने में असमर्थ होगा इसलिए महर्षि वेदव्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया था जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति वाले व्यक्ति भी वेदों का अध्ययन कर सकें व्यास जी द्वारा ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद की रचना की गई महर्षि व्यास जी को हमारे आदि गुरु माना जाता है गुरु पूर्णिमा के प्रसिद्ध त्योहार को व्यास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं और इस दिन हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर पूजा करनी चाहिए

कैसे मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा पर्व

गुरु पूर्णिमा पर लोग अपने गुरुओं को उपहार देते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं जिन लोगों के गुरु अब इस दुनिया में नहीं रहे वे लोग भी गुरुओं की चरण पादुका का पूजन करते हैं माना जाता है कि इस दिन गुरुओं का आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं शास्त्रों में गुरु को परम पूजनीय माना गया है गुरु पूर्णिमा पर्व गुरुजनों को समर्पित है शिष्य अपने गुरुदेव का पूजन करेंगे वही जिनके गुरु नहीं है वह अपना नया गुरु बनाएंगे पुराणों में कहा गया है कि मनुष्य योनि में किसी एक विशेष है व्यक्ति को गुरु बनाना बेहद जरूरी है क्योंकि गुरु अपने शिष्य का सृजन करते हुए उन्हें सही राह दिखाता है इसीलिए गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन की परंपरा चली आ रही है मिर्जा भी होगा एक पॉइंट दो पॉइंट किसी मुहूर्त होगा वही हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने गुरु पूर्णिमा के दिन सप्त ऋषियों को अपना ज्ञान प्रदान किया था इसी कारण भगवान शिव को सभी विधाओं का गुरु माना जाता है
यद्यपि भगवान श्री राम तथा भगवान श्री कृष्ण जब वह है धरा धाम पर आए तो उन्होंने भी गुरु तत्व के रूप में विश्वामित्र वशिष्ठ जी महर्षि सांदीपनि मुनि की शरण जाकर मानव मात्र को सदगुरु देव भगवान की महिमा का संदेश प्रदान किया तभी तो गुरु तत्व को ब्रह्म सामान कहा गया है अर्थात गुरु के बिना कोई भवसागर नहीं तर सकता चाहे वह ब्रह्मा जी शंकर जी के समान ही क्यों ना हो जिस ज्ञान की प्राप्ति के बाद मोह हो दुखो का समन हो जाए तथा परम ब्रह्म अर्थात स्वयं के स्वरूप की अनुभूति हो जाए ऐसा ज्ञान गुरु कृपा से हो सकता है दत्तात्रेय ने जीवन में 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की उन्होंने पेड़ पौधे पृथ्वी जल तेज वायु आकाश सबको अपना गुरु बनाया गुरु किसी व्यक्ति विशेष को नहीं कहते अपितु गुरु तत्व है गुरु ज्ञान है ज्योतिपुंज है जो संपूर्ण चराचर जगत में व्याप्त है
जिस व्यक्ति ने सद्गुरु से दीक्षा ली है सद्गुरु के अनुसार जीता है उनकी आज्ञा से चलता है ऐसा व्यक्ति सहज ही कर्मों तथा ग्रहों की चाल से निकल जाता है दुखी व्यक्ति जब मंदिर में जाकर भगवान से अपने दुख अपनी पीड़ा को बताता है तो भगवान उसे उस दुख और पीड़ा से निकलने का रास्ता नहीं बताते परंतु गुरु तो साक्षात ऐसे व्यक्ति की दुख पीड़ा दूर करने का निवारण और उपाय भी बताता है और अपनी साधना के द्वारा उसे व्यक्ति के पाप को भस्म भी कर देते हैं आप सभी साधकों को सत शिष्यों को गुरु पूर्णिमा की बहुत-बहुत बधाई।

👁️ 2 views Views
Share This Article
Translate »