दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – विकासखंड करंजिया के तिरछुला प्राथमिक शाला की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद 24 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई इसी भवन में कराई जा रही है। भवन के दो कमरों की हालत इतनी खराब है कि उनकी छत कमजोर हो चुकी है और बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता है। मजबूरी में बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
मंगलवार को विद्यालय में एक अतिथि शिक्षिका बच्चों को पढ़ाती हुई मिलीं, जबकि जानकारी के अनुसार यहां एक नियमित शिक्षक प्रभारी के रूप में पदस्थ हैं, लेकिन उनका विद्यालय आना-जाना नियमित नहीं है। आरोप है कि शिक्षक सप्ताह में केवल दो-तीन दिन ही विद्यालय आते हैं और उनके आने का कोई निश्चित समय भी नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालय भवन के बरामदे के पिलरों में गहरी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और कमरों में सीलन व जर्जरता साफ नजर आती है। ऐसे हालात में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
कक्षाओं के कमरे खाली पड़े हैं, जबकि बच्चे बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में पर्याप्त फर्नीचर और सुरक्षित अध्ययन कक्षों का भी अभाव है।
चूल्हे पर बन रहा मध्यान्ह भोजन, मीनू का नहीं हो रहा पालन
विद्यालय में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। सरकार जहां धुआं रहित रसोई और एलपीजी गैस के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, वहीं तिरछुला प्राथमिक शाला में आज भी लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा है। बताया गया कि दूरस्थ वन क्षेत्र होने के कारण गैस सिलेंडर की नियमित उपलब्धता नहीं हो पाती, जिससे रसोइयों को मजबूरी में चूल्हे का सहारा लेना पड़ता है।
आरोप लगाया कि बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। अधिकांश दिनों में केवल दाल और चावल ही परोसे जाते हैं। वहीं किचन शेड की स्थिति भी जर्जर है, जिससे भोजन बनाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय भवन का तत्काल निरीक्षण कराकर नए भवन का निर्माण कराया जाए, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में सुधार करते हुए बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए।
