दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला/गोटेगांव। महाकौशल और आदिवासी अंचल की बहुप्रतीक्षित पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–घंसौर–लखनादौन–गोटेगांव (श्रीधाम) नई रेल लाइन, जिसे नर्मदा–विंध्य रेल कॉरिडोर के नाम से जाना जा रहा है, अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की लगातार पहल,
जनसंपर्क और दस्तावेज़ आधारित अभियान का असर अब साफ़ दिखाई देने लगा है। गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक महेंद्र नागेश ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आधिकारिक पत्र भेजकर परियोजना के Final Location Survey (FLS) को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है।
विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि परियोजना का Reconnaissance Survey (RECCE Survey) पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन FLS स्वीकृति लंबित होने से आगे की प्रक्रिया रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन महाकौशल एवं छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों के विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और बेहतर रेल संपर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी लगातार इस परियोजना के समर्थन में जनप्रतिनिधियों, रेलवे अधिकारियों और केंद्र सरकार के समक्ष तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं। हाल ही में इस विषय को मीडिया में भी प्रमुखता मिली, जिसके बाद जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और बढ़ी है।
क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि रेलवे मंत्रालय जल्द Final Location Survey (FLS) को स्वीकृति देता है, तो यह परियोजना महाकौशल के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी और मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के बीच रेल संपर्क को नई मजबूती मिलेगी
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी मानना है कि ~”नर्मदा–विंध्य रेल कॉरिडोर केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल और आदिवासी अंचल के विकास की जीवनरेखा है। मुझे खुशी है कि हमारे लगातार प्रयासों और जनप्रतिनिधियों से संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। विधायक महेंद्र नागेश जी द्वारा माननीय रेल मंत्री को FLS स्वीकृति के लिए पत्र भेजना इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है। हमें विश्वास है कि रेलवे मंत्रालय जल्द Final Location Survey को मंजूरी देकर इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को आगे बढ़ाएगा। यह रेल लाइन क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर खोलेगी। हमारा प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर जाती।”
