सीधे तौर पर जिले से ठेका दिए जाने की बात आ रही सामने, जवाबदेही से बच रहा स्थानीय प्रशासन,
दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – विकासखंड के अंतर्गत जल्दा बौना स्थित शासकीय हाईस्कूल भवन के मरम्मत कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। लाखों रुपये की लागत से हो रहे इस कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थल का निरीक्षण करने पर देखा गया कि भवन की दीवारों पर पलस्तर का कार्य किया जा रहा है, लेकिन उसमें निम्न स्तर की रेत का उपयोग किया जा रहा है। परिसर में बजरी मिट्टी युक्त रेत के बड़े ढेर पड़े हैं, जो गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं। जानकारों के अनुसार ऐसी रेत से किया गया पलस्तर अधिक समय तक टिकाऊ नहीं होता।
इसके साथ ही, पलस्तर के बाद आवश्यक तराई (पानी डालने) का कार्य भी सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में दीवारों को दिन में कम से कम दो से तीन बार पानी देना जरूरी होता है, ताकि सीमेंट और रेत का मिश्रण मजबूत पकड़ बना सके। लेकिन यहां इस प्रक्रिया की अनदेखी की जा रही है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
बताया जा रहा है कि जिले में जर्जर स्कूलों और छात्रावासों के मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा लागत कम करने के उद्देश्य से घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कार्य मनमाने ढंग से किया जा रहा है और समय पर निगरानी भी नहीं हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस मरम्मत कार्य का ठेका सीधे जिला स्तर से दिया गया है, जिससे स्थानीय स्कूल प्रबंधन और विकासखंड के अधिकारी इस कार्य में अपनी भूमिका से इंकार कर रहे है। जिम्मेदारों द्वारा स्पष्ट रूप से जवाबदेही से बचने की स्थिति भी सामने आ रही है।
कुल मिलाकर, बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए स्वीकृत राशि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। पहले से जर्जर भवनों की मरम्मत भी यदि इसी तरह लापरवाही से की जाएगी, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
