जनहित के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट! सीसी सड़क पर फिर बिछ रहे पेवर ब्लॉक, नाली आज भी गायब

Revanchal
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ग्राम पंचायत पंडरिया में विकास नहीं, ‘काम पर काम’ का खेल! करोड़ों की योजनाओं पर सवाल, जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ा भ्रष्टाचार का संदेह।

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
मंडला जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मनमाने निर्माण कार्यों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जनहित की योजनाएं अब कुछ जिम्मेदार लोगों के लिए सरकारी खजाना खाली करने का जरिया बनती जा रही हैं। जिले के आदिवासी अंचलों में विकास के नाम पर ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं, जिनकी न तो वास्तविक आवश्यकता दिखाई देती है और न ही उनका कोई औचित्य समझ में आता है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन मामलों पर निगरानी रखने वाले अधिकारी भी मौन साधे बैठे हैं, जिससे पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।


ताजा मामला विकासखंड नारायणगंज की ग्राम पंचायत पंडरिया का है। यहां बस स्टैंड के समीप वार्ड में पहले से बनी सीसी सड़क के ऊपर ही इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक बिछाने का कार्य कराया जा रहा है, जबकि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या जल निकासी आज भी जस की तस बनी हुई है। बरसात शुरू होते ही सड़कें तालाब बन जाती हैं, लेकिन नाली निर्माण की ओर किसी का ध्यान नहीं है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत वास्तव में विकास चाहती तो सबसे पहले नालियों का निर्माण कराती, ताकि बरसात का पानी आसानी से निकल सके। लेकिन इसके उलट पहले से बनी सड़क पर फिर नया निर्माण कराकर सरकारी राशि खर्च की जा रही है। लोगों का आरोप है कि यह जनहित नहीं बल्कि बजट खपाने और सरकारी धन की बंदरबांट का खेल है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत अपनी पुरानी लापरवाही और अधूरे विकास कार्यों को छिपाने के लिए नए-नए निर्माण कार्यों का सहारा ले रही है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि जहां नाली की जरूरत है वहां नाली नहीं बनाई जा रही, लेकिन ठीक-ठाक सड़क के ऊपर फिर से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों का आरोप है कि पंचायत, संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाले कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय एक-दूसरे को संरक्षण देकर सरकारी धन के दुरुपयोग पर पर्दा डाल रहे हैं।


क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण कार्यों की स्वीकृति, लागत, तकनीकी गुणवत्ता और आवश्यकता का मूल्यांकन कराया जाए। यदि अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में कठोर कार्रवाई की जाए।


ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्य केवल कागजों और ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है, न कि बार-बार एक ही स्थान पर निर्माण कर सरकारी खजाने को खाली करना। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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