धूमा थाने में पदस्थ एएसआई की निष्पक्षता पर उठे सवाल, पीड़ितों ने लगाए पक्षपात के आरोप

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – धूमा (सिवनी)। धूमा थाना में पदस्थ एएसआई रविन्द्र सिंह राजपूत की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। ओबीसी एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कुछ पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उनकी शिकायतों पर समय पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि सामान्य वर्ग के आरोपियों के मामलों में पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण दिखाई देता है।

ओबीसी और एसी परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

7 मार्च 2026 को धूमा निवासी कृष्ण कुमार तिवारी के घर वन विभाग द्वारा इमारती लकड़ी के मामले में कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कथित रूप से शक के आधार पर कृष्ण कुमार तिवारी ने मोहल्ले के एक सोनी परिवार के साथ गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी तथा घर में घुसने का प्रयास किया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि धूमा थाना, पुलिस अधीक्षक सिवनी तथा मुख्यमंत्री कार्यालय तक सबूतों सहित शिकायतें देने के बावजूद लगभग 103 दिनों तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। लगातार शिकायतों के बाद 18 जून 2026 को धूमा पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया।

दोबारा उपद्रव का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि 26 जून 2026 को आरोपी ने पुनः उनके घर पहुंचकर हंगामा किया। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को फोन के माध्यम से दी गई तथा वीडियो और लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। पीड़ित का आरोप है कि थाना में पदस्थ एएसआई रविन्द्र सिंह राजपूत प्रारंभ में आवेदन लेने के लिए तैयार नहीं हुए। काफी प्रयास के बाद आवेदन की पावती तो दी गई, लेकिन पीड़ित को अब भी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।

दलित परिवार की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

इसी प्रकार एक अन्य मामले में अनुसूचित जाति वर्ग की एक महिला एवं उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि कृष्ण कुमार तिवारी द्वारा उनके साथ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत लेकर धूमा थाना पहुंचने पर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

पीड़ित परिवार के अनुसार उन्होंने दो बार जनसुनवाई, दो बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा दो बार अनुसूचित जाति थाना में आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

महिला का यह भी आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर दर्ज शिकायत को बंद कराने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। 

निष्पक्ष जांच की मांग

दोनों मामलों के पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुलिस सभी वर्गों के लोगों की शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई करे तो आमजन का कानून व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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