शासन पर उपेक्षा का आरोप, बोले—जब सभी को मिला पदोन्नति का लाभ तो पटवारी क्यों रहे वंचित?
दैनिक रेवांचल टाइम्स।
मध्य प्रदेश में राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पटवारियों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर शासन के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। 3 अगस्त से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू होने के साथ ही राजस्व विभाग के अनेक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पटवारी संघ का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो इसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाली राजस्व सेवाओं पर पड़ेगा।
पटवारी संघ का आरोप है कि शासन ने वर्षों बाद विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया, लेकिन भू-प्रबंधन एवं संसाधन विभाग के सबसे महत्वपूर्ण मैदानी कर्मचारी—पटवारी—आज भी कैडर रिव्यू और पदोन्नति से वंचित हैं। संघ का कहना है कि यह व्यवहार पटवारी वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण है।
संघ ने बताया कि 8 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कैडर रिव्यू लागू करने, समयमान वेतनमान की विसंगति दूर करने, लंबित मानदेय का भुगतान, नायब तहसीलदार विभागीय परीक्षा आयोजित कराने तथा जज प्रोटेक्शन एक्ट का लाभ देने की मांग की गई थी। लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने के बाद चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया।
15 जुलाई से सामूहिक अवकाश, 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर कार्य, 24 जुलाई से शासकीय ग्रुपों का बहिष्कार और 28 जुलाई से ऑनलाइन कार्य बंद करने के बाद अब 3 अगस्त से पटवारियों ने अपने अभिलेख बस्ते तहसील कार्यालयों में जमा कर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है।
संघ का कहना है कि हड़ताल के दौरान नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फसल गिरदावरी, आय-निवास एवं जाति प्रमाण पत्रों से जुड़ी राजस्व प्रक्रिया सहित अनेक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों, किसानों और ग्रामीणों को उठानी पड़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पटवारी वर्षों से अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन, धरना और चरणबद्ध आंदोलन करते रहे, तो शासन ने समय रहते संवाद और समाधान का रास्ता क्यों नहीं अपनाया? यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो उसकी कीमत आखिर जनता को ही चुकानी पड़ेगी।
छिंदवाड़ा जिले की तामिया तहसील सहित प्रदेशभर के पटवारी आंदोलन में शामिल हैं। तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे पटवारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक कैडर रिव्यू सहित लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
तहसील अध्यक्ष आनंद ढांकरिया ने कहा कि यह लड़ाई किसी विशेष वर्ग के हित की नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।
