बारिश आते ही शुरू हुआ मरम्मत का खेल
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।
बारिश की पहली फुहार के साथ ही जबलपुर रायपुर नेशनल हाईवे-30 पर बने वर्षों पुराने पुलों की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। सवाल यह है कि यदि पुलों की स्थिति पहले से ही जर्जर थी और उन पर बने गड्ढे वर्षों पुराने हैं, तो उनकी समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण क्यों नहीं कराया गया? आखिर हर वर्ष बारिश शुरू होते ही खानापूर्ति जैसी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ती है?
जबलपुर-रायपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-30 मध्य भारत के सबसे व्यस्त मार्गों की गिनती में आता है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद कई पुलों पर गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई सतह, कमजोर रेलिंग और क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारें लंबे समय से दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
तो वहीं राहगीरों का कहना है कि इस हाईवे पर दुर्घटनाएं अब सामान्य बात बन चुकी हैं। लगभग हर सप्ताह किसी न किसी सड़क हादसे में लोगों की जान चली जाती है या परिवार अपनों को खो देता है। इसके बावजूद स्थायी समाधान के बजाय केवल बारिश के मौसम में पैबंद लगाकर व्यवस्था को दुरुस्त दिखाने का प्रयास किया जाता है।
आखिर जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के रखरखाव और निर्माण कार्यों के बावजूद हाईवे की हालत बार-बार खराब क्यों हो जाती है? यदि पुलों की उम्र पूरी हो चुकी है या वे संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं, तो उनका तकनीकी परीक्षण कर पुनर्निर्माण क्यों नहीं कराया जा रहा? क्या केवल डामर, सीमेंट सड़क किनारे लगाए जाने वाले गट्टू और पेंट से पुल सुरक्षित हो जाएंगे?
यह हाईवे केवल जबलपुर और रायपुर को ही नहीं जोड़ता, बल्कि मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, कबीरधाम सहित कई जिलों की जीवनरेखा है। इसी मार्ग से एंबुलेंस, स्कूली वाहन, यात्री बसें और मालवाहक ट्रक प्रतिदिन गुजरते हैं। ऐसे में पुलों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
- वर्षों से जर्जर पुलों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कब कराया गया?
- जिन पुलों पर बार-बार मरम्मत हो रही है, उनका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया?
- रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट होगा या नहीं?
- क्या संबंधित एजेंसियां किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं?
तो वहीं जिले से आने वाले जनप्रतिनिधि जो केंद्र से लेकर राज्य सरकार में अपनी जिम्मेदारी सम्हाले हुए है, लेकिन जब बात जबलपुर रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की निर्माण और उनके क्षति ग्रस्त पुलों के सम्बन्ध में और सरकार तक बात पहुंचनी होती हैं तो अपनी इन जिम्मेदारियों से भागते हुए नजर आते हैं। बारिश के मौसम में की जाने वाली यह मरम्मत फिलहाल विभाग द्वारा पुलों की वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास जरूर लगती है, लेकिन आमजन की सुरक्षा केवल रंग-रोगन और पैबंद से सुनिश्चित नहीं हो सकती। आवश्यकता है कि नेशनल हाईवे-30 के सभी पुराने पुलों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए और जहां जरूरत हो, वहां नए पुलों का निर्माण कराया जाए, ताकि हर वर्ष दोहराई जाने वाली इस खानापूर्ति पर हमेशा के लिए विराम लग सके।
