मनमानी पर उतारू राजस्व विभाग, फार्मर आईडी से लेकर नामांतरण तक लटके काम

Revanchal
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घर-घर सर्वे के बजाय किसानों को कार्यालय बुलाने का आरोप

राजस्व सेवाओं की बदहाली से बढ़ रहा आक्रोश

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। मंडला जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों और ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फार्मर आईडी बनाने का कार्य निर्धारित तरीके से नहीं किया जा रहा है। घर-घर जाकर किसानों का पंजीयन करने के बजाय उन्हें राजस्व निरीक्षक कार्यालयों में बुलाया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसान योजना से वंचित रह रहे हैं। वहीं नामांतरण, बंटवारा, किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और केवाईसी जैसे अनेक राजस्व संबंधी कार्य भी लंबित पड़े हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और मनमानी को लेकर समय-समय पर शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। इससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो हजारों किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं।

फार्मर आईडी निर्माण में बरती जा रही लापरवाही

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करने तथा विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से फार्मर आईडी निर्माण अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए राजस्व अमले को गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर किसानों का पंजीयन करने के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन नैनपुर तहसील अंतर्गत डिठौरी राजस्व निरीक्षक कार्यालय क्षेत्र में इन निर्देशों का पालन नहीं होने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पटवारी गांवों में नियमित रूप से पहुंचकर कार्य नहीं कर रहे हैं। गांवों में केवल मुनादी कराकर किसानों को कार्यालय बुलाया जा रहा है और वहीं सीमित संख्या में फार्मर आईडी बनाई जा रही है। जो किसान किसी कारणवश कार्यालय तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनकी आईडी नहीं बन रही है।

परसवाड़ा पंचायत के किसानों ने उठाए सवाल

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत परसवाड़ा में भी किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित पटवारी द्वारा गांव में घर-घर जाकर कार्य नहीं किया जा रहा है। किसानों को राजस्व निरीक्षक कार्यालय बुलाकर औपचारिक रूप से काम किया जा रहा है, जबकि अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी की क्षेत्र में नियमित उपस्थिति भी नहीं रहती, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे किसानों का समय और धन दोनों व्यर्थ हो रहे हैं।

नामांतरण और बंटवारे के मामलों का बढ़ता अंबार

फार्मर आईडी के अलावा राजस्व विभाग के अन्य कार्य भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत परसवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, अभिलेख सुधार और अन्य राजस्व प्रकरणों का लंबा लंबित रिकॉर्ड मौजूद है। कई किसान महीनों से अपने मामलों के निराकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
राजस्व विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण भूमि संबंधी विवादों का समाधान भी समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।

योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे किसान

किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी, ई-केवाईसी और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होना जरूरी है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण अनेक किसानों का पंजीयन अधूरा है और उनकी केवाईसी भी नहीं हो पा रही है।
ऐसी स्थिति में पात्र किसान भी योजनाओं की राशि से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर पंजीयन और सत्यापन नहीं हुआ तो आगामी किश्तों का लाभ प्रभावित हो सकता है।

पूर्व में भी उठ चुका है मामला

ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं और समाचारों के माध्यम से मामला उठाया गया था, लेकिन संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आ रहा है और समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जवाबदेही तय करने की मांग
किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे जिले में फार्मर आईडी निर्माण अभियान की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। साथ ही जिन क्षेत्रों में घर-घर जाकर कार्य नहीं किया जा रहा है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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