दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर। जबलपुर शहर का प्रमुख और व्यस्ततम शास्त्री ब्रिज इन दिनों एक गंभीर जनसमस्या का केंद्र बनता जा रहा है। ब्रिज के नीचे नगर निगम द्वारा पिछले कई वर्षों से कचरे की डंपिंग की जा रही है, जो अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि यहां आए दिन कचरे में आग लगना आम बात हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में जहरीला धुआं फैल रहा है और लोगों का जीना दूभर हो गया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले इस मुद्दे को लेकर खबर प्रकाशित होने पर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि शास्त्री ब्रिज के नीचे कचरा डंपिंग जल्द बंद कर दी जाएगी। अधिकारियों का कहना था कि कचरा कॉम्पैक्टर मशीन खराब होने के कारण अस्थायी रूप से यहां डंपिंग की जा रही है और जल्द ही सफाई कर दी जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है—न तो डंपिंग बंद हुई और न ही सफाई की कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दी।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डंपिंग स्थल के बिल्कुल पास रेलवे ट्रैक स्थित है, जहां से रोजाना हजारों यात्री गुजरते हैं। इसके अलावा आसपास घनी आबादी भी है और ठीक पीछे इन दिनों मेला भी लगा हुआ है। ऐसे में यदि कभी बड़ा अग्निकांड होता है, तो न केवल बीमारियों का खतरा बढ़ेगा, बल्कि जान-माल का नुकसान भी हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे में अक्सर असामाजिक तत्व आग लगा देते हैं, जिससे उठने वाला धुआं पूरे ब्रिज और आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लेता है। इससे न केवल वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है, बल्कि जहरीले धुएं के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। रेलवे यात्रियों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
आश्चर्य की बात यह है कि जबलपुर नगर निगम के पास खुद का विशाल कचरा प्रबंधन प्लांट मौजूद है, जहां कचरे से बिजली उत्पादन तक किया जाता है। इसके बावजूद शहर के बीचों-बीच इस तरह की अस्थायी डंपिंग न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम रेलवे से अनुमति लेकर यहां कचरा डंप कर रहा है और आसपास के इलाकों से कचरा लाकर यहां इकट्ठा किया जाता है, जिसे बाद में प्लांट भेजा जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया में लोगों को होने वाली परेशानी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
लोगों ने यह भी बताया कि पिछले लगभग तीन वर्षों से यह डंपिंग जारी है। वहीं, क्षेत्र में विकसित हो रहे “न्यू गोरखपुर” प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए कुछ लोग कहते हैं कि भविष्य में यह डंपिंग अपने आप बंद हो जाएगी, क्योंकि इतनी महंगी संपत्तियों के बीच कोई भी इस तरह की दुर्गंध और प्रदूषण बर्दाश्त नहीं करेगा। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी कम से कम तीन साल और लगने की संभावना है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या तब तक स्थानीय लोगों को इसी तरह जहरीले धुएं और गंदगी के बीच जीवन यापन करने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा? जरूरत है कि नगर निगम इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान ले और शास्त्री ब्रिज के नीचे हो रही कचरा डंपिंग को बंद कर स्थायी समाधान निकाले, ताकि लोगों को राहत मिल सके और किसी बड़े हादसे से पहले स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
