
दैनिक रेवांचल टाईम्स बजाग। जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ने और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को जनपद पंचायत बजाग के सभागार में हितधारकों की बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का विषय “जनजातीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ समन्वय” रखा गया था।
बैठक का आयोजन आईसीएमआर-राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (NIRTH), जबलपुर, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में क्षेत्र में पारंपरिक रूप से उपचार करने वाले वैद्य, गुनिया-पंडा सहित स्वास्थ्य विभाग एवं जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक शामिल हुए। जबलपुर से आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोगों को मरीजों के उपचार के साथ आवश्यकतानुसार उन्हें स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाने की समझाइश दी।
अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई मरीज पारंपरिक उपचार के लिए उनके पास आता है तो आयुर्वेदिक अथवा स्थानीय स्तर पर प्रचलित उपचार करने के साथ मरीज की गंभीर स्थिति को पहचानना भी जरूरी है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल भेजने में देरी नहीं की जानी चाहिए।
सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक से बचने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सांप के काटने के बाद पहले झाड़-फूंक कराने में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाया जाना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से सर्पदंश पीड़ित की जान बचाई जा सकती है।
बैठक का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोगों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को समय पर उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना रहा
