हौसलों का सूर्योदय: 211 जवानों ने ली देशसेवा की शपथ, हर्ष फायर और देशप्रेम के तराने से गूंजा8वीं वाहिनी का परेड ग्राउंड

Revanchal
3 Min Read

रेवांचल टाइम्स ​छिंदवाड़ा

“मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है…” की जीवंत मिसाल पेश करते हुए पीटीएस 8वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल, छिंदवाड़ा में 15वें नवआरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का भव्य दीक्षांत परेड समारोह संपन्न हुआ। शुक्रवार, 5 जून 2026 की सुबह ठीक 8 बजे जब परेड ग्राउंड पर अनुशासित कदमताल गूंजी, तो वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यह सिर्फ एक साधारण सूर्योदय नहीं था, बल्कि मध्यप्रदेश पुलिस के 211 युवा जांबाजों के जीवन का एक नया और स्वर्णिम सवेरा था।

मुख्य अतिथि ने ली परेड की सलामी, हुआ हर्ष फायर
​इस गौरवशाली समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशेष सशस्त्र बल, चंचल शेखर रहे। मंच की ओर बढ़ते ही मुख्य अतिथि को परंपरा के अनुसार जनरल सैल्यूट देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के सम्मान में एलएमजी से हर्ष फायर किया गया, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा। परेड कमांडर के नेतृत्व में मुख्य अतिथि ने दीक्षांत परेड का बारीकी से निरीक्षण किया और जवानों के ऊंचे मनोबल की सराहना की।

कठिन तपस्या के बाद साकार हुआ सपना
​8वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल की मुखिया व मुख्य अभियंता श्रीमती निवेदिता गुप्ता की देखरेख में आयोजित इस समारोह में जवानों का अनुशासन देखते ही बनता था। खाकी वर्दी का मान बढ़ाने के लिए इन 211 जोड़ी आंखों ने न जाने कितनी रातें कड़ी मेहनत और कड़े प्रशिक्षण में समर्पित की हैं, तब जाकर आज यह सुनहरा पल उनके सामने आया। ये जवान अब आने वाले कई वर्षों तक बिना थके, अपनी निष्ठा, लगन और कर्तव्यपरायणता से मध्यप्रदेश को सुखी, समृद्ध और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
​इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए जबलपुर जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रमोद वर्मा सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। समारोह में डीआईजी राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक अजय पांडे, उपपुलिस अधीक्षक आशीष खरे, सीएसपी अजय राणा सहित विभिन्न थानों के टीआई, एसडीओपी और भारी संख्या में पुलिस बल व जवानों के परिजन उपस्थित थे।


​🇮🇳 विशेष देशभक्ति रचना: “ये खाकी नहीं, देश का स्वाभिमान है” 🇮🇳


​मातृभूमि के चरणों में, सर्वस्व लुटाने आए हैं,
हम खाकी वाले सीने में, अंगारे छुपाकर लाए हैं।
धाराएं कितनी प्रतिकूल मिलें, हम लहरों से टकराएंगे,
जिस पथ पर शूल बिखरे होंगे, हम उस पर राह बनाएंगे।
​यह वर्दी सिर्फ लिबास नहीं, 140 करोड़ का विश्वास है,
हर मजहब की ये ढाल बने, इसमें ही रक्षक की सांस है।
जब तक रग में है रक्त शेष, मां का मस्तक न झुकने देंगे,
तूफान भले ही आ जाए, कदमों को न रुकने देंगे।
​खम ठोक ठेलता वीर जहां, पर्वत पानी बन जाता है,
जब देश प्रेम का ज्वार उठे, इतिहास नया बन जाता है।
आज शपथ ली है हमने, जन-जन को सुरक्षित रखना है,
इस पावन मिट्टी की खातिर, जीना है और मरना है।

👁️ 131 views Views
Share This Article
Translate »