शिकायतों पर नही हो रही कार्यवाई आखिर न्याय करेगा कौन
रेवांचल टाइम्स चाबी मोहगांव मंडला जनपद पंचायत मोहगांव अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चाबी एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्षों से ग्रामीणों द्वारा शिकायतें किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज पंचायत के पंचों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। पंचों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और विभिन्न मदों से प्राप्त लाखों रुपये की राशि के उपयोग में भारी अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

पंचों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मोहगांव को लिखित शिकायत सौंपते हुए पंचायत के वित्तीय लेन-देन, विभिन्न योजनाओं में खर्च की गई राशि और विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
पंचों का आरोप जानकारी मांगने पर भी नहीं दिया जाता हिसाब
शिकायत के अनुसार पंचायत के निर्वाचित पंचों को ही पंचायत के आय-व्यय की जानकारी नहीं दी जा रही है। पंचों का कहना है कि ग्राम सभा और सामान्य सभा की बैठकों में पांचवें वित्त आयोग और पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत नहीं की जाती।पंचों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022-23 से लेकर वर्ष 2024-25 तक पंचायत को विभिन्न मदों में प्राप्त राशि, उसके उपयोग और स्वीकृत कार्यों की जानकारी बार-बार मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं वित्तीय गड़बड़ी को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
बाजार नीलामी से मिली लाखों की राशि पर सवाल
शिकायत में पंचायत की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल बाजार नीलामी की राशि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पंचों के अनुसार वर्ष 2022-23 में बाजार की नीलामी लगभग 13 लाख 50 हजार रुपये तथा वर्ष 2023-24 में लगभग 13 लाख 22 हजार रुपये में की गई थी।पंचों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि पंचायत को प्राप्त होने के बावजूद उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया, इसकी कोई जानकारी न तो ग्राम सभा में दी गई और न ही पंचों को उपलब्ध कराई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि राशि विकास कार्यों में खर्च की गई है तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि नहीं किए गए तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
सुपर मार्केट की दुकानों का किराया भी सवालों के घेरे में
ग्राम पंचायत चाबी के अंतर्गत संचालित सुपर मार्केट की दुकानों से नियमित रूप से किराया वसूला जाता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस किराए से पंचायत को प्रतिवर्ष अच्छी-खासी आय होती है, लेकिन उसकी लेखा-जोखा जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती।
पंचों ने मांग की है कि पिछले कई वर्षों में दुकानों से प्राप्त किराया राशि, उसके बैंक खातों में जमा होने और खर्च किए जाने का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि पंचायत की आय और व्यय में पारदर्शिता नहीं होने से भ्रष्टाचार की आशंका लगातार बढ़ रही है।
नल-जल योजना की वसूली का भी नहीं दिया जा रहा हिसाब
ग्रामीणों ने नल-जल योजना को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि पंचायत द्वारा प्रत्येक माह उपभोक्ताओं से जल कर और अन्य शुल्क वसूले जाते हैं, लेकिन इस राशि का उपयोग कहां किया जा रहा है, इसकी जानकारी पंचायत की बैठकों में नहीं दी जाती।
पंचों का कहना है कि योजना के संचालन, रखरखाव और मरम्मत के नाम पर राशि खर्च दिखाई जाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति की जानकारी ग्रामीणों से छिपाई जा रही है। ऐसे में पूरे मामले की वित्तीय जांच आवश्यक हो गई है।
बिना निर्माण के निकाल ली गई लाखों की राशि
शिकायत में सबसे बड़ा आरोप खेत तालाब निर्माण योजना को लेकर लगाए गए हैं।सूत्रों से जानकारी अनुसार कि ग्राम पंचायत चाबी के बगली मोहल्ले में स्थित खसरा नंबर 85/2, रकबा 0.29 हेक्टेयर भूमि पर खेत तालाब निर्माण के लिए लगभग साढ़े चार लाख रुपये की लागत स्वीकृत हुई थी।
आरोप है कि यह तालाब सरपंच के भाई सेवकराम धुर्वे के नाम पर स्वीकृत किया गया था, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य नहीं हुआ। इसके बावजूद योजना की राशि निकाल ली गई और मजदूरी भुगतान भी दर्शा दिया गया। यदि मौके पर निर्माण नहीं हुआ तो फिर मजदूरी किसे दी गई, किस खाते में राशि डाली गई और कार्य पूर्ण होने का प्रमाण किस आधार पर जारी किया गया। यह अपने आप में जांच का विषय है।
सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री पर मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत में हो रही कथित अनियमितताओं के पीछे सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की मिलीभगत है। उनका कहना है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई है।
पंचों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई। परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बजाय उसे संरक्षण मिलता रहा।
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों और पंचों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद यदि जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो इससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार का सीधा असर विकास कार्यों और आम जनता के अधिकारों पर पड़ता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और लोकायुक्त तक मामला ले जाएंगे।
निष्पक्ष जांच की मांग
पंचों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि पंचायत के समस्त वित्तीय अभिलेखों, बैंक खातों, निर्माण कार्यों, मस्टर रोल, भुगतान रजिस्टर और योजनाओं की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
अब देखना यह होगा कि ग्राम पंचायत चाबी में लगाए गए इन आरोपों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। सवाल सिर्फ लाखों रुपये के हिसाब का नहीं है, बल्कि पंचायत राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के विश्वास का भी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होना जरूरी है, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो सच्चाई सामने लाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। फिलहाल पंचायत के पंचों ने न्याय की गुहार लगाई है और उनकी नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है
वही जब मोहगांव मुख्य कार्यपालन अधिकारी से इस संबंध में जानकारी लेनी चाही गई तो अधिकारी के द्वारा कॉल रिसीव नही किया गया क्या अधिकारी जबाब देने से बच रहे है।
