जनता पूछ रही—जब सड़क एक माह नहीं टिक सकी तो लाखों रुपये गए कहां?
नैनपुर/मंडला। नगर पालिका परिषद नैनपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी का एक और मामला सामने आया है। लाखों रुपये की लागत से बनाई गई सीसी सड़क निर्माण के महज 20 से 30 दिनों के भीतर ही जगह-जगह से दरकने लगी है। सड़क पर उभरी दरारें न केवल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार राजा राठौर और नगर पालिका उपयंत्री अभिलाष श्रीवास की कथित मिलीभगत से निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसका परिणाम अब सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है। जनता का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में पूरी ईमानदारी और तकनीकी मानकों का पालन किया गया होता तो नई सड़क इतनी जल्दी दरारों से नहीं भरती।
20 दिन में फटी सड़क, विकास की नहीं भ्रष्टाचार की पहचान बनी
नगर पालिका परिषद द्वारा लगभग 200 मीटर लंबी सीसी सड़क का निर्माण कराया गया था। निर्माण पूरा होते ही इसे विकास कार्य के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क की वास्तविकता सामने आने लगी। सड़क में जगह-जगह लंबी दरारें दिखाई देने लगीं और कई हिस्सों में निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे।
नगरवासियों का कहना है कि यह सड़क नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का स्मारक बन गई है। जिस सड़क पर वर्षों तक लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए थी, वह एक माह भी नहीं टिक पाई।
घटिया सामग्री और तकनीकी नियमों की अनदेखी के आरोप
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार विभिन्न स्थानों पर निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं हुई हैं—
सालोमन बहन जी से महेश जायसवाल के घर तक बनी सड़क में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया।
वंदना सिंह से अजय तिवारी के प्लॉट तक बिना उचित बेस और बिना रोलर मशीन चलाए सड़क निर्माण किए जाने का आरोप है।
बंदेवार के घर से नहर तक सड़क निर्माण में निर्धारित मोटाई का पालन नहीं किया गया।
सड़क निर्माण के दौरान पर्याप्त पानी की तराई नहीं की गई, जिससे कंक्रीट समय से पहले कमजोर पड़ गई।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
सड़क को सड़क से जोड़ना तक भूल गए!
सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि कई स्थानों पर सड़क के हिस्सों को तकनीकी रूप से सही तरीके से जोड़ा ही नहीं गया। लोगों का आरोप है कि जब निर्माण की खामियां उजागर होने लगीं तो ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर गायब हो गया।
जनता सवाल उठा रही है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था तब निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या गुणवत्ता परीक्षण केवल कागजों में ही पूरा कर लिया गया?
नगर परिषद में विकास कम, सवाल ज्यादा
नैनपुर नगर परिषद में यह पहला मामला नहीं है जब विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। नगर में पहले भी कई निर्माण कार्य विवादों में रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनता की सुविधाओं के नाम पर स्वीकृत राशि का लाभ कुछ चुनिंदा ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों तक सीमित हो जाता है, जबकि आम नागरिकों को घटिया निर्माण का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
शिकायतें ऊपर तक, अब कार्रवाई का इंतजार
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन विभाग, प्रभारी मंत्री, कलेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर नगरीय प्रशासन सहित विभिन्न स्तरों पर की गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, भुगतान रोका जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पार्षद का आरोप
वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद सुनील विश्वकर्मा का कहना है कि नगर के कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही हैं और उनकी जांच कराई जानी चाहिए।
उपयंत्री का पक्ष
उपयंत्री अभिलाष श्रीवास का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार से दोबारा निर्माण कराया जाएगा तथा भुगतान रोका जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके घर पर कराए गए कार्य की राशि उन्होंने स्वयं भुगतान की है।
जनता का सवाल
जब नई सड़कें कुछ ही दिनों में टूटने लगें, जब निर्माण पूरा होते ही दरारें दिखाई देने लगें और जब शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नजर न आए, तब जनता का व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
अब देखना यह है कि नैनपुर नगर परिषद इस मामले में केवल जांच का आश्वासन देती है या फिर वास्तव में सड़क निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करती है। जनता को इंतजार है कि विकास के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपये का हिसाब कौन देगा।
