मानवता की पुकार, पिता के साये के साथ छिनी खुशियां, अब समाज निभाएगा ‘इंसानियत का फर्ज’

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स ​छिंदवाड़ा

नियति का क्रूर प्रहार कब किस हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दे, यह कोई नहीं जानता। लिंगा निवासी योगेश ठाकरे के आकस्मिक निधन ने न केवल एक परिवार का स्तंभ ढहा दिया, बल्कि पीछे छोड़ गया है बेसहारा मां और उन मासूम बेटियों को, जिनकी दुनिया अपने पिता के इर्द-गिर्द सिमटी थी।
​बीती 1 मई को दिल का दौरा (अटैक) पड़ने से योगेश की सांसें हमेशा के लिए थम गईं। इस वज्रपात ने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि पर मानो ग्रहण लगा दिया है। आज यह परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहा है।

​मदद के लिए आगे आई समिति
​इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल देने के लिए स्थानीय समिति ने हाथ आगे बढ़ाए हैं। समिति के सदस्य पवन साहू द्वारा इन जरूरतमंद बेटियों और मां की स्थिति को देखते हुए सहायता का विनम्र आग्रह किया गया है। समिति का लक्ष्य है कि सामूहिक प्रयासों से इस बिखरे हुए परिवार को फिर से खड़ा होने का साहस दिया जा सके।


​आपकी एक छोटी सी पहल बदल सकती है जीवन,
​समिति ने प्रबुद्ध नागरिकों और दानदाताओं से अपील की है कि वे अपनी सामर्थ्य अनुसार (500 से 1000 रुपये तक की मूल्य की) खाद्य सामग्री या दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान कर पुण्य के सहभागी बनें।
​अपेक्षित सामग्री, गेहूं, आटा, चावल, दाल, शक्कर, खाद्य तेल, कपड़े एवं अन्य किराना सामान।
​उद्देश्य, एकत्रित सामग्री और नकद राशि लेकर समिति के सदस्य स्वयं लिंगा जाएंगे, ताकि शोक संतप्त परिवार को राशन भेंट कर उन्हें यह अहसास कराया जा सके कि समाज उनके साथ खड़ा है।


सेवा समिति ने कहा है कि
​दुख की इस घड़ी में किसी के आंसू पोंछना ही सच्ची मानवता है। आइए, हम सब मिलकर अपनी इंसानियत का फर्ज निभाएं और इस परिवार को ढांढस बंधाएं।
​ समस्त दानदाता अपनी सामग्री समिति के निर्धारित केंद्र पर जमा करा सकते हैं, ताकि शीघ्र ही राहत सामग्री पीड़ित परिवार तक पहुँचाई जा सके।

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