भीषण गर्मी में बेजुबानों का सहारा बनी ‘जल गंगा संवर्धन’ पहल

Revanchal
3 Min Read
  • दक्षिण पन्ना के रैपुरा रेंज में मधुमक्खियों के संरक्षण हेतु की गई अनूठी जल व्यवस्था

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच दक्षिण पन्ना वनमण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील मानवीय प्रयासों की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। वर्तमान समय में जहां जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं, वहीं वन विभाग द्वारा राज्य शासन के “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत जंगलों में वन्यजीवों एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मधुमक्खियों के लिए विशेष जल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस अभिनव पहल की स्थानीय ग्रामीणों एवं प्रकृति प्रेमियों द्वारा सराहना की जा रही है।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल के अंतर्गत रैपुरा वन परिक्षेत्र की सागौनी, भरतला, चमरैया, जमुनिया एवं बघनरवा बीटों में पारंपरिक जल स्रोतों “झिरिया” का निर्माण एवं पुरानी झिरियों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भीषण गर्मी के दौरान भी वन क्षेत्रों में जल उपलब्धता बनी हुई है, जिससे मधुमक्खियों सहित अनेक छोटे वन्यजीवों को राहत मिल रही है। इन जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते सक्रिय रूप से देखे जा रहे हैं।

वन विभाग के मैदानी अमले ने मधुमक्खियों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक एवं संवेदनशील तकनीक भी अपनाई है। सामान्यतः खुले अथवा गहरे जल स्रोतों पर पानी पीते समय मधुमक्खियां डूबकर मर जाती हैं। इसे रोकने के लिए जल स्रोतों की उथली जगहों पर छोटे पत्थर एवं सूखी लकड़ियों की डंडियां रखी गई हैं, ताकि मधुमक्खियां उन पर सुरक्षित बैठकर बिना किसी खतरे के पानी पी सकें। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से प्रतिदिन हजारों मधुमक्खियों की रक्षा हो रही है।

मधुमक्खियां पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन एवं परागण प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनका संरक्षण प्रत्यक्ष रूप से जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा हुआ है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को भी मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है।

इस पुनीत कार्य को धरातल पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने में वनरक्षक रजनीश चौरसिया, प्रेमशंकर सिंह, धीरेन्द्र सिंह एवं वनरक्षक सतीश द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वनकर्मियों द्वारा प्रदर्शित यह संवेदनशीलता एवं कर्तव्यपरायणता न केवल वन विभाग के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि समाज के लिए भी प्रकृति संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश प्रस्तुत करती है।

👁️ 1 views Views
Share This Article
Translate »